राम मंदिर पर अध्यादेश लाने पर विचार नहीं कर रही है बीजेपी, खुद मंत्री जी ने किया खुलासा

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नई दिल्ली/लखनऊ : बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने राम मंदिर को लेकर एक ऐसा बयान दिया जिससे राम के भक्त बीजेपी सरकार से रूठ सकते हैं. इतना ही नहीं अगर उनके बयान में थोड़ी भी सत्यता है तो 2019 के चुनाव में बीजेपी के वोट बैंक में विपरीत असर भी पड़ सकता है.

विजयवर्गीय का कहना है कि बीजेपी फिलहाल अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने के बारे में नहीं सोच रही है लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि बीजेपी ही अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कर सकती है. ऐसा इस वजह से क्योंकि किसी और में ऐसा करने का दम नहीं.

उनका ऐसा मानना है कि मंदिर के मुद्दे ने बीजेपी को फायदे कम नुकसान ज्यादा किया. इस मुद्दे को विपक्ष अल्पसंख्यकों को डराने और वोटों के ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल करने में लगा है. उन्होंने कहा कि “हम अदालत से एक बार फिर इस मसले पर फैसला सुनाने की अपील करेंगे. जब तक मामला अदालत में है, हमें जल्दबाजी न करते हुए उसे फैसले के लिए उचित समय देना चाहिए.” विजयवर्गीय ने कहा कि “अगर लोगों की आकांक्षाएं बढ़ती रहीं, तो सरकार को इस पर (अध्यादेश पर) फैसला लेना होगा. लेकिन फिलहाल हम ऐसा नहीं सोच रहे हैं.”

विहिप और शिवसेना बनी सरकार के लिए मुसीबत
आपको बता दें कि विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और शिवसेना के द्वारा लगातार राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग की जा रही है. जिसे लेकर विजयवर्गीय ने अपनी बात रखी कि उन्हें जल्द फैसले की अपील लेकर कोर्ट जाना चाहिए.

विपक्ष के लगाए गए आरोप की बीजेपी चुनावों से पहले राम मंदिर मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश में जुटी है, विजयवर्गीय ने विपक्ष के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया और रहा कि “इस मुद्दे को बीजेपी ने नहीं बल्कि संतों और दूसरे संगठनों ने उठाया है. पार्टी कभी राम मंदिर मुद्दे को लेकर चुनावों में नहीं उतरी. हमारा एजेंडा हमेशा ‘सबका साथ सबका विकास’ रहा है.”

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