लखनऊ: भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी होने वाली इमारतों में, नियमों को ताक पर रखकर, अवैध निर्माण और अतिक्रमण का जो कारनामा किया जाता है. उसकी तस्वीर ट्वीन टावर और होटल लेवाना सरीखी ही सामने आती है. राजधानी लखनऊ के लेवाना होटल में हुए अग्निकांड की लपटों ने 4 जिंदगियों को लील लिया, 14 लोग अभी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
होटल पर खुलासा
हजरतगंज इलाके में हुए इस हादसे से हर कोई हैरान है…क्योंकि, जांच में जो खुलासे हुए हैं…उसके मुताबिक तो…
इस भूखंड पर आवासीय निर्माण का शपथ पत्र दिया गया था
लेकिन 6400 वर्ग मीटर एरिया में होटल लेवाना बनाया गया
नक्शा जमा ना करने पर 4 बार नोटिस जारी किया गया था
होटल मालिकों ने किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया
NOC देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई
इस अवैध होटल में नियमों को ताक पर रखकर बार, कैफे,बैंक्वेट हॉल और कॉन्फ्रेंस मीटिंग रूम के अलावा सैलून और स्पा भी चल रहे थे ।
हादसे के बाद जागे ‘हाकिम’ !
लेवाना होटल अग्निकांड के बाद प्रशासन की आंखें खुली. आनन-फानन में होटल के मालिक अग्रवाल बंधु राहुल और रोहित अग्रवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.हालात से हलकान हाकिमों की टीम भी हकीकत जानने के लिए पहुंची, इनमें पुलिस कमिनश्र, फॉरेंसिक टीम, अग्नि विभाग के अधिकारी, लखनऊ विकास प्राधिकरण की टीम ने भी जायजा लिया. होटल मालिकों और महाप्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया ।
उठ रहे हैं सवाल…
आवासीय भूखंड पर होटल बन गया प्राधिकरण को क्यों पता नहीं चला?
बिना नक्शा पास कराए आलिशान होटल कैसे बन गया?
नोटिस पर नोटिस भेजने के बजाए कार्ररवाई क्यों नहीं हुई?
सीएम योगी का आदेश, होटल पर चलेगा बुलडोजर
होटल लेवाना सुइट्स में लगी आग मामले में योगी सरकार सख्त हो गई है. होटल पर तो बुलडोजर चलेगा ही साथ ही करीब 10 दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी. लेकिन एक बुनियादी सवाल है कि, भ्रष्टाचार की नींव और नियमों को ताक पर रखकर ताबीर होने वाले होटल , बैंक्वेट हॉल, मॉल और अस्पतालों की पड़ताल के लिए एक बड़ा अभियान नहीं चलाया जाना चाहिए. क्या इन दोषी अधिकारियों के घरों पर बी बुलडोजर नहीं चलना चाहिए. ऐसा कड़ा कानून बनना चाहिए ताकि, भविष्य में ऐसी इमारतें किसी की जान ना ले पाएं।
