मथुरा: राममंदिर विवाद के सुलझने के बाद अब मथुरा-काशी (MATHURA KASHI) के मुद्दे जोर पकड़ते दिखाई दे रहे हैं. अयोध्या (AYODHYA) में राममंदिर के फैसले के बाद सियासी गलियारों से लेकर धार्मिक गलियारों तक मथुरा-काशी को लेकर बयानों का सिलसिला भी चल रहा है. इसी कड़ी में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मालिकाना हक और शाही ईदगाह को हटाने को लेकर एक याचिका दाखिल की गई है.
30 सितंबर को होगी सुनवाई
मथुरा की सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है. ‘भगवान श्रीकृष्ण विराजमान’ की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में अदालत से 13.37 एकड़ की जन्मभूमि का मालिकाना हक मांगा गया है. और 1968 के समझौते को रद्द करने की मांग की गई है. हालांकि 12 अक्तूबर 1968 को कटरा केशव देव की जमीन का समझौता श्रीकृष्ण जन्मस्थान सोसायटी के जरिए किया गया था. जिसमे 20 जुलाई 1973 को ये जमीन डिक्री की गई अब इसयाचिका में डिक्री को खारिज करने की मांग की गई है.
कौन हैं वादी-प्रतिवादी
बताया जा रहा है कि, ये याचिका अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री, प्रवेश कुमार, राजेश मणि त्रिपाठी, कमलेश कुमार शुक्ला, शिवानी सिंह और त्रिपुरारी तिवारी के जरिए दाखिल कराई गई है. इस याचिका में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को प्रतिवादी बनाया है.
लोग बोले बंद हो मंदिर-मस्जिद के झगड़े
राममंदिर के बाद अब कृष्ण जन्मस्थान को लेकर शुरु हो रही सुगबुगाहट के बीच तमाम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. बाबरी के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी का कहना है कि, देश अब आगे बढ़ चुका है मंदिर-मस्जिद की लड़ाई बंद होनी चाहिए।
