लखनऊ: उत्तर प्रदेश में उपचुनाव (UP BYPOLL) के ऊंट ने करवट ले ली है. 2022 से पहले होने वाले बड़े और कड़े सियासी मुकाबले का मुहुर्त निकला है. 7 सीटों पर 3 नवंबर को मतदान होगा और 10 नवंबर को इन सीटों के नतीजे, सूबे के सियासी गलियारी में शोर कर रहे होंगे।
8 के बजाए 7 पर चुनाव क्यों?
वैसे तो 8 सीटों पर उपचुनाव होना था, लेकिन आजम खान के बेटे वाली रामपुर (RAMPUR) की स्वार सीट पर चुनाव का ऐलान नहीं हुआ है. बाकी जो 7 सीट हैं, उनमें से 5 सीटें विधायकों के निधन से सीटें खाली हुईं है और इन 7 में से 6 पर बीजेपी और 1 पर सपा का कब्जा था.
BJP की तैयारी क्या?
अब सिलसिलेवार तरीके से तैयारियों की तस्वीर देखें तो बीजेपी ने हर सीट पर एक मंत्री और एक संगठन पदाधिकारी को जिम्मेदारी दी है. प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री खुद मोर्चा संभाले हुए हैं. संगठन महामंत्री सुनील बंसल खुद कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं।
विपक्ष की रणनीति?
उपचुनाव के इस रण में अब सभी पार्टियों के दावों का इम्तिहान भी शुरू हो गया है. बाजी चली जा रही हैं, दांव खेले जा रहे हैं. उपचुनाव से दूर रहने वाली बसपा ने भी उम्मीदवारों को उतराना शुरु कर दिया है. वहीं उन्नाव और स्वार में प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करके उम्मीदवारों के ऐलान में कांग्रेस दो कदम आगे है. 2022 में बाइसकिल का नारा लगाने वाली सपा के खेमे में भी तैयारियां तेज हो चली हैं.
आजम के गढ़ में चुनाव क्यों नहीं?
स्वार सीट से अब्दुल्ला आजम विधायक थे
आजम खान के बेटे हैं अब्दुल्ला आजम
प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी के चलते अयोग्य घोषित हुए अब्दुल्ला
अब्दुल्ला के 6 साल तक चुनाव ना लड़ने पर रोक
राष्ट्रपति के पास पहुंचा है अब्दुल्ला आजम का मामला
मामला राष्ट्रपति के पास होने से चुनाव नहीं होगा
विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार को लिखा था पत्र
16 दिसंबर 2018 को रद्द हुई अब्दुल्ला की सदस्यता
कुल मिलाकर 2020 की बिसात पर 2022 का सेमीफाइनल माना जा रहा है ये उपचुनाव क्योंकि, इसके रिजल्ट से ही सभी राजनीतिक दलों की ताकत भी तौली जाएगी. देखना दिलचस्प होगा कि, कौन करेगा 2022 के लिए क्वालिफाई?
