24 साल बाद मायावती-मुलायम एक साथ, गेस्ट हाउस कांड का दर्द छलका !

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सपा संरक्षक मुलायम सिंह के चुनावी क्षेत्र मैनपुरी में 24 साल बाद एक इतिहास फिर दोहराया गया. दरअसल, सपा-बसपा शुक्रवार को एक ही मंच पर सजी दिखीं. मैनपुरी में सपा बीएसपी और रालोद की संयुक्त रैली आयोजित की गयी. जहां मायावती ने मुलायम सिंह यादव के लिए वोट मांगे. इतना ही नहीं जो एक समय में एक दूसरे के धुरविरोधी हुआ करते थे और एक दूसरे पर निशाना साधा करते थे वे आज एक दूसरे की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे थे. दोनों ने एक-दूसरे की प्रशंसा करते नहीं थके.

उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए ये बेहद ही रोमांचक पल था जब दो पार्टियां पुरानी कड़वाहट भूलाकर एक ही मंच पर थीं. आपको बता दें कि मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से सपा के उम्मीदवार हैं और वे लंबे समय से यहां अपनी जीत हासिल करते रहे हैं. मुलायम सिंह ने 1996, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में जीतकर संसद तक का रास्ता तय किया. मुलायम कि यहां स्थिति इतनी मजबूत है कि अगर सपा यहां अकेले भी चुनाव लड़ती है तो उसकी जीत पक्की थी. इस बार के चुनाव में सपा को बसपा का समर्थन हासिल है.

अब हम आपको बताते हैं कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती, मुलायम सिंह और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस जनसभा में क्या कुछ कहा. सबसे पहले बात करते हैं मुलायम सिंब यादव के संबोधन की. मुलायम ने सबसे पहले सपा-बसपा के गठबंधन को लेकर कहा कि “मायावती हमारे लिए वोट मांगने आयीं इसके लिए हम उनका स्वागत करते हैं. मैं आपके इस एहसान को कभी नहीं भूलूंगा.” इसके बाद उन्होंने सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि “मायावती का बहुत सम्मान करना होगा. माया ने हमेशा हमारा साथ दिया है.”

इसके साथ ही मैनपुरी की इस रैली में मुलायम सिंह यादव ने एक ऐलान किया जो यूपी राजनीति के लिए काफी मायने रखता है. उन्होंने कहा कि “यह मेरा आखिरी चुनाव है. हर बार मैनपुरी के लोग हमें जिताते आए हैं. आखिरी चुनाव में भारी बहुमत से और जिता देना. हर जीत से यह बड़ी होनी चाहिए.”

मुलायम सिंह यादव के बाद बारी थी मायावती के संबोधन की. बीएसपी प्रमुख मायावती ने सबसे पहले मुलायम सिंह के लिए जनता से वोट की अपील की. मायावती वे गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि “न भूलने वाले कांड के बाद भी हम एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं.”

इसके बात मायावती ने मुलायम सिंह की तारीफों के पुल बांधने शुरू कर दिए. उन्होंने कहा कि “मुलायम सिंह ने सभी वर्गों को जोड़ा है.” पीएम मोदी की जाति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि “मोदी की तरह वो नकली पिछडे़ वर्ग के नहीं है. मुलायम ही पिछड़ों के असली नेता हैं.”

इसके बाद सभा को संबोधित करने की बारी थी अखिलेश यादव की. अखिलेश ने जनता से कहा कि “ये चुनाव देश के भविष्य से जुड़ा हुआ है. भाजपा ने नोटबंदी और जीएसटी लगाकर व्यापार बंद कर दिया है. हमें नया प्रधानमंत्री बनाना है. नया प्रधानमंत्री बनने से ही नया भारत बनेगा.”

आज सपा और बसपा का गठबंधन अपनी जीत की कोशिशों में लगा है लेकिन पिछले 25 सालों में जो कड़वाहट दोनों ही पार्टियों के बीच थी उसकी शुरुआत कहां से हुई आइए इस बारे में भी जान लेते हैं. दरअसल, गेस्ट हाउस कांड के बाद दोनों पार्टियों का रिश्ता खत्म हो गया था. मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के दौर से ही सपा-बसपा साथ थी लेकिन साल 1995 में सब बदल गया और दोनों एक दूसरे के दुश्मन हो गए.

2007 में मायावती ने अपने दम पर उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार खड़ी की. तो वहीं साल 2012 में सपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ और वो सत्ता में आयी लेकिन साल 2017 के विधानसभा चुनाव में जिस तरह से बीजेपी ने बहुमत हासिल कर दोनों ही पार्टियों को सत्ता की कुर्सी के आस पास फटकने भी नहीं दिया. तब सपा और बसपा के बीच की दूरियां कम होने लगी और मयावती ने उपचुनावों में सपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया.

जब उपचुनाव में मायावती और अखिलेश की जोड़ी रंग लायी और सपा ने जीत हासिल कर लिया. इस जीत के बाद दोनों को ऐसा लगा कि यूपी को सपा और बसपा का साथ पसंद है फिर क्या था लोकसभा चुनाव में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी और रालोद को भी अपने गठबंधन में शामिल किया है. शुक्रवार को तीनों पार्टियां एक ही मंच साझा करती दिखीं. देखना ये होगा दोनों पार्टियों का ये साथ अब जनता को कितना भाता है.

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