लखनऊ: अभी तक आपने विपक्षी दलों के विधायकों सांसदों को सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी करते देखा होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के सियासी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि, सत्ता पक्ष के ही विधायक उत्पीड़न की बात कहकर अपनी ही सरकार के खिलाफ हो गए.
विधायकों ने लगाए विधायक एकता जिंदाबाद के नारे
दरअसल, उत्तर प्रदेश में शीतकालीन सत्र का पहला दिन था. और पहले ही दिन आलम ये रहा कि, बीजेपी के विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ विधानसभा में धरने पर बैठ गए. बीजेपी के विधायकों के विपक्ष का भी भरपूर समर्थन मिला. इस धरने के दौरान इन विधायकों ने विधायक एकता जिंजाबाद के नारे भी बुलंद किए.
क्या था पूरा मामला?
गाजियाबाद के लोनी से बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर अपनी बात रखना चाहते थे. प्रशासन की प्रताड़ना की दास्तां बताना चाहते थे लेकिन उन्हें बोलने से रोक दिया गया. इससे नाराज होकर नंद किशोर विधानसभा में ही धरने पर बैठ गए. नंद किशोर को पार्टी के अन्य विधायकों का भी साथ मिला. बताया जा रहा है कि, एक के बाद ये आंकड़ा करीब 200 जा पहुंचा. इस धरने में विपक्ष के भी करीब 40 विधायक शामिल हो गए. सपा प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि, एक विधायक का अपमान हमारा अपमान है. बता दें कि, नंद किशोर गुर्जर पर एक खाद्यअधिकारी से मारपीट के आरोप लगे हैं. इस सिलसिले में वो सीएम से भी मिले थे लेकिन तब भी सीएम से मिलने के बाद नंद किशोर का एक पत्र सोशल मीडिया में वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए थे.
अखिलेश यादव ने ली चुटकी
वहीं इस मामले पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी चुटकी ली अखिलेश यादव ने ट्वीटकरते हुए कह कि,
उप्र विधानसभा से विचित्र समाचार मिला है कि भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ भाजपा के ही विधायक अपने उत्पीड़न के विषय पर 200 अन्य भाजपा विधायकों के साथ धरने पर बैठे और दूसरे दलों के विधायकों का भी उन्हें साथ मिला.
मुखिया जी के राज में, उन्हीं के विधायक दुखिया जी…
