प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे राज्यकर्मचारियों की हड़ताल को भलेही अवैध ठहरा दिया हो लेकिन कोर्ट की एक टिप्पणी ने इनके हौसलों को और मजबूत करने का काम किया है. दरअसल, कोर्ट ने सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा है कि, आपके मुताबिक जब नई पेंशन स्कीम इतनी ज्यादा अच्छी है तो सांसदों विधायकों को भी नई पेंशन स्कीम में शामिल क्यों नहीं कर रहे.
कोर्ट ने पूछे सवाल
दरअसल, राज्यकर्मचारियों ने नई पेंशन स्कीम का विरोध करते हुए हड़ताल की घोषणा कर की थी जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये कहते हुए हड़ताल को अवैध करार दिया कि, इससे आम आदमी को परेशानी होती है. वहीं राज्यकर्मियों के पेंशन को लेकर हड़ताल करने और राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने सरकार से कई सवाल पूछे हैं
1- कर्मचारियों की मंजूरी के बिना उनका पैसा शेयर मार्केट में कैसे लगाया जा सकता है?
2- शेयर बाजार में लगाया गया पैसा डूब गया तो जिम्मेदार कौन होगा?
3- 30-35साल तक सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारी को पेंशन क्यों नहीं देना चाहते?
4- क्या सरकार कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन का आश्वासन भी नहीं दे सकती?
‘हड़ताल से हाईकोर्ट का काम भी हुआ था प्रभावित’
राज्यकर्मचारियों की हड़ताल के कारण राजकीय मुद्रणालय में हाईकोर्ट की कॉज लिस्ट भी नहीं छप पाई थी तो न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और राजेंद्र कुमार की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका कायम की थी
‘लूटखसोट की योजनाओं में हिचकिचाहट नहीं, पेंशन में क्यों?’
इस मामले पर सुनवाई करते हुए पीछ ने सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि, जब करोड़ों रुपए की लूट खसोट वाली योजनाएं लागू करने में हिचकिचाहट नहीं होती है तो फिर 30-35 साल तक सेवा करने वाले कर्मचारियों को पेंशन देने में क्या परेशानी है.
‘सांसद-विधायकों को भी दे नई पेंशन’
नई पेंशन पर सरकार की दलीलों से असंतुष्ट अदालत ने कहा कि, अगर पुरानी पेंशन स्कीम के बजाए नई पेंशन स्कीन इनी ही ज्यादा अच्छी है तो उसे सांसदों और विधायकों के लिए क्यों लागू नहीं किया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि, सांसदों और विधायकों को तो बिना किसी सरकारी नौकरी के पेंशन दी जा रही है. जबकि, नेता लोग साथ में वकालत और दूसरे काम भी करते हैं जबकि, सरकार को लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी जा रही.
10 दिन में मांगा ब्यौरा
कोर्ट ने हड़ाती कर्मचारियों से कहा कि, आपकी हड़ताल से आम जनता को परेशानी होती है आप अपनी शिकायत और नई पेंशन स्कीम की कमियों का ब्यौरा दस दिन के अंदर अदालत में पेश करें. वहीं सरकार से कहा है कि, आप 25 फरवरी तक विचार करके अदालत को बताएं.
