राजा भैया ने की सीएम योगी से मुलाकात, क्या थामेंगे BJP का दामन!

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और कुंडा प्रतापगढ़ के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने सोमवार (22 अक्टूबर) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारियों के बीच उनकी सीएम से मुलाकात को अहम माना जा रहा है. समझा जा रहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को अपनी राजनीतिक पारी के रजत जयंती समारोह के लिए निमंत्रण दिया है. मुलाकात के बाद विपक्षी पार्टियों में हलचल बढ़ गई है.
1993 से चुनाव जीतते आ रहे हैं राजा भैया
राजा भैया 1993 से लगातार निर्दलीय विधायक हैं. वह कई बार मंत्री रह चुके हैं. 25 साल तक एक सीट से लगातार निर्दलीय चुनाव जीतने वाले पहले राजनीतिज्ञ हैं. उनके राजनीतिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर 30 नवंबर को राजधानी में समारोह आयोजित किया जाएगा. इस समारोह से पहले सोमवार रात उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की.
नई पार्टी के लिए चुनाव आयोग में किया था आवेदन
करीब 20 मिनट की मुलाकात के बाद राजा भैया मीडियाकर्मियों से बातचीत किए बगैर निकल गए. माना जा रहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को रजत जयंती समारोह का निमंत्रण दिया है. उनकी सीएम के साथ राजनीतिक चर्चा भी हुई. इसी समारोह में राजा भैया राजनीतिक दल बनाने का एलान कर सकते हैं. सपा से अलग होकर शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया. उसी राह पर चलते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने अपनी नई पार्टी बनाने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं. बाहुबली विधायक राजा भैया ने नई पार्टी के गठन के लिए चुनाव आयोग में 10 अक्टूबर को आवेदन किया है.

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समाजवादी पार्टी के लिए सियासी दांव!
समाजवादी पार्टी से रिश्ते बिगड़ने के बाद राजा भैया का यह बड़ा सियासी दांव है. राजा भैया की इस कवायद को सवर्णों को लामबंद करने की मुहिम के रूप में देखा जा रहा है. आपको बता दें कि राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुए मतभेद के बाद से ही वे नई सियासी जमीन तलाश रहे हैं.

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जगह-जगह कैंपेन चला रहे हैं राजा भैया के समर्थक
राजा भैया के समर्थकों द्वारा देश-प्रदेश एवं विदेश में रह रहे राजा समर्थकों से नया दल बनाने, बीजेपी या सपा को समर्थन देने का कैंपेन चलाया जा रहा था. इसी कैंपेन के लेकर संपूर्ण उत्तर प्रदेश और देश के लगभग 25 राज्यों से 20 लाख से अधिक समर्थकों ने इस कैंपेन में भाग लिया था.

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