अलीगढ़वासी फिर देख सकेंगे दूध की नदियां !

अपना अलीगढ़

वैसे तो जिले में पशुधन भले ही कम हो रहा हो, मगर यहां अब खूब ‘दूध’ की नदियां बहती हुई दिखाई देंगी. आप सोच रहे होंगे जब पशुधन कम हो रहा है तो फिर दूध की नदियां भला कैसे बह सकती हैं. दरअसल, और जिलों की तरह यहां भी त्योहार से पहले दूध का काला कारोबार शुरू हो जाता है. दीपावली व अन्य त्योहार निकट आते ही फिर से जिले में ‘ दूध’ की फैक्ट्री लगना शुरू हो गई हैं.

अलीगढ़ में सफेद जहर!
यहां दूध के सफेद रंग में काला कारोबार करने वाले सफेद जहर मिला रहे हैं? लोगों को तब पता लगता है जब वह दूध पीकर बीमारियों से घिर जाते हैं

नकली दूध में मिलता है यह सब
दूध में सबसे ज्यादा मिलाया जाने वाला पदार्थ पानी है, इसके अलावा दूषित जल भी दूध में मिलाया जाता है.जो कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म देता है। वहीं, नकली (सिंथेटिक) दूध बनाने के लिए स्टार्च, कास्टिक सोडा, यूरिया, घुला चूना, फार्मेलीन, अमोनियम सल्फेट आदि की मिलावट होती है।

क्या मिलाकर तैयार किया जाता है दूध?
डिटरजेंट : दूध में मिलाने से यह जहरीला हो जाता है। इससे पेट संबंधी परेशानियां होती हैं। यह क्षारीय होने से शरीर के ऊतकों व प्रोटीन नष्ट कर देता है।
यूरिया : यूरिया युक्त दूध से उल्टी, बेचैनी, चक्कर, जी मिचलाना आदि समस्याएं हो सकती हैं। गुर्दे को नुकसान हो सकता है।
फार्मेलीन : दूध में इसकी मिलावट से लीवर को नुकसान पहुंचता है

कैसे करें मिलावटी दूध की पहचान?

विशेषज्ञों के अनुसार चिकनाई निकले दूध की बूंद यदि चलते समय लाइन नहीं छोड़े और सिंथेटिक व मिलावटी दूध जीभ पर रखने से कसैला लगता है।
पकड़े गए प्रमुख मामले
16 जनवरी 2017 को अकराबाद क्षेत्र के गांव नगला रेवती में छापेमारी कर सिंथेटिक दूध पकड़ा
14 जून 2017 को चंडौस के नवाबपुर गांव में तीन मकानों में सिंथेटिक दूध की फैक्ट्री पकड़ी
04 जून 2018 को मोहल्ला महावीरगंज में एक घर में चल रही सिंथेटिक दूध की फैक्ट्री पकड़ी
9 जून 2018 को थाना गांधी पार्क क्षेत्र के बौनेर में सिंथेटिक दूध की फैक्ट्री पकड़ी

प्रशासन जल्द चलायेगा अभियान
हर बार की तरह प्रशासन की दलील है कि, मिलावटखोरों को आमजन की सेहत से खिलवाड़ नहीं करने देंगा. सिंथेटिक दूध व अन्य मिलावटी वस्तुओं की बिक्री रोकने को जल्द ही अभियान चलेगा.

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