नई दिल्ली : गुरुवार को अयोध्या मामले की सुनवाई का 15वां दिन रहा, रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने दलील दी कि जन्मस्थान पर इमारत थी, लेकिन उसे मस्ज़िद नहीं कह सकते, जबर्दस्ती कब्जा की गई ज़मीन पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती. पूजास्थल को गिरा कर बनी इमारत शरीयत के हिसाब से मस्ज़िद नहीं है. ऐसे में विवादित ढांचे को इस्लामिक कानून के मुताबिक मस्जिद नहीं कहा जा सकता. पीएन मिश्रा ने कहा कि 1860 तक विवादित जगह पर मुसलमानों द्वारा नमाज़ पढ़े जाने के कोई सबुत नहीं है. ख़ुद उनका कहना है कि हर शुक्रवार को विवादित जगह को कुछ घँटों के लिए खोला जाता था. इस्लाम के मुताबिक ऐसी जगह जहां दिन में दो बार अज़ान के वक़्त नमाज़ नही पढ़ी जाती, वो जगह मस्ज़िद तो नहीं हो सकती.
दिया पैगंबर मोहम्मद का हवाला
पी एन मिश्रा ने अपनी दलीलों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मस्ज़िद हमेशा मस्ज़िद रहेगी, ये ज़रूरी नहीं. पैगंबर मोहम्मद ने कहा था कि किसी का घर तोड़ कर वहां मस्जिद नहीं बनाई जा सकती. अगर ऐसा किया गया तो जगह वापस उसके हकदार को दे दी जाए. ये एक तरह से उनका वचन था. उनके अनुयायियों पर भी ये वचन लागू होता है. उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक वक़्फ़ बंनाने वाले को ज़मीन का मालिक होना चाहिए. बाबर उसका ज़मीन का मालिक नही था और ये बात इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में मानी गई है कि बाबर उस जमीन का मालिक नहीं था और बाबर ने मस्जिद नही बनाई थी.
कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की कि जहाँ इस्लाम में अल्लाह के आलावा किसी और की पूजा की मनाही है, वहीं हिंदू धर्म ये मानता है कि आप किसी भी तरह पूजा करे, किसी भी रूप में पूजा करे. वो अंततः एक ही परमशक्ति की आराधना होती है. इस मायने में हिन्दू धर्म की मान्यता इस्लाम से अलग है हिंदू ऐसी जगह भी पूजा कर सकते है, जहाँ नमाज पढ़ी गई हो. संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि सोमवार से मुस्लिम पक्ष इस मामले में बहस शुरू करेगा
