लखनऊ : 2019 के चुनाव से पहले चारों ओर सपा-बसपा के गठबंधन की चर्चा जोरों से चल रही है, मायावती और अखिलेश यादव के एक साथ आ जाने से बीजेपी की नींद उड़ सी गई है, बीजेपी इस गठबंधन का मुकाबला करने के लिए प्लान बी की तैयारी कर रही है, खबरों के मुताबिक सपा-बसपा में इस बात की भी सहमति हो चली है कि कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 37-37 सीटों पर दोनों पार्टियां 2019 का चुनाव लड़ेंगी, हालांकि कौनसी पार्टी किस सीट से लड़ेगी इसपर अभी फैसला बाकी है, तो एक बार फिर उत्तर-प्रदेश में सपा-बसपा का गठबंधन लगभग तैयार हो चुका है.
हवा में उड़ गया जयश्रीराम का नारा
1993 में जब देशभर में रामलहर थी, सियासत राम नाम के इर्द घुम रही थी, तब ओबीसी और दलित फैक्टर ने राम नाम की लहर को ध्वस्त कर. राजनीति का नया अध्याय शुरु किया था, दरअसल 1992 में विवादित ढ़ांचा गिराये जाने के बाद उस समय के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने इस्तीफा दे दिया, उत्तर-प्रदेश में बीजेपी की सरकार हिल गई, सूबे में राष्ट्रपति शासन स्थापित हो गया, अगले साल चुनाव हुए जिसमें बीजेपी को उम्मीद थी की रामलहर में वो फिर से सत्ता हासिल कर लेगी, लेकिन सूबे में तब-तक मुलायम सिंह और कांशीराम गठबंधन कर चुके थे, दोनों की जोड़ी ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा और बीजेपी को हराकर लखनऊ की कुर्सी हासिल की, कुर्सी हासिल करने के बाद सपा-बसपा ने सीएम बनने का फॉर्मूला तैयार किया, जिसमें छह-छह महीने के लिए दोनों पार्टी के बड़े नेता सीएम बनते. पहली बार में मायावती मुख्यमंत्री बनीं. मगर 94 में जब मुलायम सिंह यादव के सीएम बनने का नंबर आया.तब मायावती ने उनसे समर्थन वापस ले लिया. जिससे सरकार अल्पमत में आ गई.
गेस्ट हाउस कांड
सपा समर्थकों को मायावती का ये कदम रास नहीं आया और उन्होंने 2 जून 1994 को मायावती को लखनऊ स्थित गेस्ट हाउस में घेर लिया.उस वक्त गेस्ट हाउस में बसपा की बैठक चल रही थी. अचानक बड़ी तादाद में सपा समर्थक गेस्ट हाउस पहुंचे और बसपा समर्थकों के साथ मारपीट शुरु करदी, उनका निशाना मायावती पर भी था, लेकिन मायावती ने किसी तरह अपनी जान बचाई और गेस्ट हाउस के एक कमरे में छा छिपी, कमरे के दरवाजे पर सोफे और चेयर भिड़ा दिए, ताकि किसी भी कीमत पर दरवाजा खुल ना पाए, कुछ समय तक गेस्ट हाउस में सपा समर्थकों ने जमकर बवाल काटा, लेकिन आखिरी वक्त में बीजेपी के नेता ने आकर मायावती की जान बचाई. गेस्ट हाउस कांड के बाद मायावती मुलायम सिंह में गहरी दुश्मनी हो चली औऱ बाद में फिर कभी गठबंधन नहीं हुआ
2019 के गठबंधन में क्या अलग है
ये गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए तय हुआ है, 2019 में होने वाले चुनाव सांसद का चुनाव होगा, इसमें किसी पार्टी का मुखिया मुख्यमंत्री नहीं बनेगी, इसलिए ये गठबंधन बना है, अब देखना होगा ही 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में ये गठबंधन किस और बैठेगा.
