नई दिल्ली: अमरीश पुरी पर्दे पर जब हीरो के साथ नजर आते थे तो उनके आगे बड़े से बड़ा एक्टर भी फीका नजर आता था. आज बॉलीवुड के उसी ‘मोगैम्बो’ की बर्थ एनीवर्सरी है. वो भले ही 15 सालों पहले इस दुनिया को अलविदा कह गए हैं लेकिन अपने शानदार अभिनय की वजह से वो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं.
दिए एक से एक डॉयलॉग
सिमरन के ‘बाबूजी’ या भी फिर मिस्टर इंडिया का ‘मोगैम्बो’… अमरीश पुरी ने अपनी जिंदगी में कई यादगार रोल निभाए. उन्हें बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन के तौर पर पहचाना जाता था. आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको बताएंगे, उनकी लाइफ से जुड़ी कुछ खास बातें. क्या आप जानते हैं कि अमरीश पुरी ने बॉलीवुड में आने से पहले अपनी जिंदगी के लगभग दो दशक एक बीमा कंपनी को दिए थे. उन्होंने दो दशकों तक एक बीमा कंपनी के कर्मचारी के तौर पर काम किया था.
एक्टिंग के लिए छोड़ी नौकरी
वहीं 21 सालों की नौकरी उन्होंने बॉलीवुड में आने और अपने एक्टिंग प्रेम के लिए छोड़ दी थी. उन्हें थिएटर का शौक काफी पहले से था लेकिन कोई खास मौका हाथ नहीं लग सका था. वहीं एक वक्त ऐसा आया, जब उन्हें प्ले भी मिला और वो मशहूर थिएटर आर्टिस्ट के तौर पर पहचाने भी जाने लगे. इसके बाद उन्होंने राइटर डायरेक्टर सत्यदेव दुबे के सहायक के तौर पर काम किया.
1970 में मिला पहला ब्रेक
अमरीश पुरी को फिल्मों में पहला ब्रेक मिला साल 1971 में. इस साल उनकी फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ आई और इसमें अमरीश पुरी की एक्टिंग को जबरदस्त तारीफें मिलीं. इसके बाद अमरीश पुरी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. धीरे-धीरे खलनायकों की दुनिया में एक अमर किरदार बन गया. उनका डायलॉग मोगैंबो खुश हुआ तो बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के जुबान पर चढ़ गया.
