स्पेशल डेस्क : 2018 का साल कुछ ही पलों में बीतने वाला है. इस साल को देख जाए तो कई सारी खुशियों ने इस साल दस्तक दी, तो कई बार किसी को थोड़ी सी उदासी का सामना करना पड़ा. ये साल जितना हमारे और आपके लिए खास था. यूपी की राजनीति के लिए उससे भी कहीं ज्यादा खास था. इस बार बीजेपी को कभी राम मंदिर मामले में मौन धारण करना पड़ा तो कभी योगी के फैसले ने बसपा की मायावती, सपा के अखिलेश यादव की बोलती बंद कर दी. तो चलिए साल के आखिरी पलों में नजर डालते हैं उन बड़े घटनाक्रमों पर जितने सियासत के राजनेताओं औऱ आम जनता को सोचने पर मजबूर कर दिया.
हार का तिकड़म
विजय रथ पर सवार दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल.भारतीय जनता पार्टी के लिए ये साल कहीं खुशी कहीं गम जैसा रहा.इस साल जहां त्रिपुरा नागालैंड और मेघालय जैसे उत्तर- पूर्वी राज्यों में बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब रही.वहीं बीजेपी के गढ़ कहे जाने वाले गोरखपुर फूलपुर और कैराना में हार का मुंह तांकना पड़ा.

गठबंधन की राह.बीजेपी के लिए खतरा
उपचुनाव के बाद विपक्षी पार्टियों की नजर अब 19 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर है.सपा-बसपा के गठबंधन की खबरे सियासी फिजाओं में तैर रही हैं.ऐसे में अगर सपा-बसपा और आरएलडी का गठबंधन होता है.तो 19 की राह बीजेपी के लिए काटों भरी होगी

राम के द्वारे, उद्धव ठाकरे
हिंदुत्तव की बात करने वाली शिवसेना पार्टी के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पहली बार रामजन्मभूमि अयोध्या आए.मंदिर निर्माण में हो रहे देरी पर सरकार को घेरना और जल्द मंदिर निर्माण के लिए सरकार पर दवाब बनाने आए ठाकरे अपने पूरे परिवार के साथ अयोध्या पहुंचे थे.दो दिवसीय दौरे के दौरान शिवसेना प्रमुख ने साधु संतों से आशीर्वाद लिया.और दूसरे दिन राम लला के दर्शन किए

26 साल बाद
1992 के बाद एख बार फिर 26 साल बाद अयोध्या में रामभक्तों का जमावड़ा लगा.इस साल 25 नवंबर को आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद ने अयोध्या में धर्मसभा का आयोजन किया.भक्तमाल आश्रम के निकट 90 बीघा जमीन पर यह धर्मसभा हुई.जिसमें 80 फिट का मंच सजाया गया.धर्मसभा में शामिल हुए रामभक्तों के लिए.अयोध्या के स्कूल-धर्मशालाओं में ठहराने के इंतजाम किए गए.इस विशाल धर्मसभा में तमाम संत, हिन्दूवादी नेता शामिल हुए जिन्होंने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया.

‘रावण’ की रिहाई
2017 में सहारनपुर में हुए जातीय दंगों के मुख्य आरोपी चंद्रशेखर उर्फ रावण को इस साल 14 सितंबर को जेल से रिहाई मिली.बता दें कि सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में…दलितों और राजपूतों के बीच जातीय संघर्ष हुआ था…जिसमें एक शख्स की मौत भी हुई थी…इस जातीय हिंसा को फैलाने के लिए…भीम आर्मी पर आरोप लगे, लिहाजा पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया गया था, गिरफ्तारी के विरोध में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की…जिसपर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चंद्रशेखर की रिहाई के आदेश जारी किए थे.
