लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्याले में रह रहकर तूफान उठ रहे हैं. और ये तूफान खासकर विपक्ष के खेमे में जमकर खलबली मचा रहे हैं. प्रियंका गांधी का एक दांव बुधवार के दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसा भूचाल लेकर आया जिसने मायावती से लेकर अखिलेश यादव तक को अचानक मिलने के लिए मजबूर कर दिया. इतना ही नहीं इस टकराव को टालने के लिए विपक्ष के बुजुर्ग नेताओं को दखल देना पड़ा इन वरिष्ठ नेताओं ने देर रात तक सभी दलों के लोगों से फोन पर बात करके इस मसले को संयम के साथ सुलझाने को कहा है.
चंद्रशेखर से प्रियंका गांधी की मुलाकात ने बढ़ाई बेचैनी
कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी मेरठ के अस्पताल में भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद से मिलने पहुंची. अचानक हुई इस मुलाकात को प्रियंका का दलित जोड़ो अभियान माना जा रहा है. सियासी गलियारों में चंद्रशेखर के नगीना और दूसरी सीट से चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी तेज हुई लेकिन खुद चद्रशेखर ने इन खबरों का खंडन कर दिया. लेकिन इस मुलाकात ने शाम होते-होते सपा-बसपा के खेमे में खलबली मच गई.
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अचानक मायावती से मिले अखिलेश यादव

प्रियंका गांधी चंद्रशेखर से मिलकर दिल्ली पहुंची ही होंगी कि, खबर आई कि, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव अचानक माावती से मिलने पहुंचे. इस मुलाकात में अखिलेश यादव के साथ संजय सेठ भी थे. इस मुलाकात का लब्बोलुआब यही बताया गया कि, चंद्रशेखर और प्रियंका गांधी की मुलाकात से मायावती बेहद नाराज हैं.
अमेठी-रायबरेली पर कांग्रेस के लिए कठिन चुनौती की तैयारी
अखिलेश यादव और मायावती की मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में खबर आई कि, प्रियंका के दांव से बहन जी दबाव में नहीं आने वालीं बल्कि बहन जी अमेठी-रायबरेली में अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला कर सकती हैं. बता दें कि, सपा-बसपा के गठबंधन ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अमेठी सीट और सोनिया गांधी की रायबरेली सीट पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है.
विपक्ष में खींचतान, बीजेपी में खुशी की खुमारी
सपा-बसपा गठबंधन से कांग्रेस को बाहर करने पर बीजेपी को भले ही बहुत खुशी ना हुई हो लेकिन बुधवार से बने नए घटनाक्रम ने बीजेपी नेताओं के चेहरों को खिला दिया है. सपा-बसपा और कांगेस की आपसी खीचतान में बीजेपी अपने लिए खुशी ही खुशी खोज रही है. बीजेपी टकटकी लगाए देख रही है कि, मायावती कांग्रेस पर और ज्यादा आक्रामकर हो. इसी गुस्से में वो अमेठी रायबरेली में अपने उम्मीदवार खड़ा करके कांग्रेस के लिए चुनौती खड़ी कर दें. अगर ऐसा हुआ तो इन दोनों सीट पर बीजेपी की बल्ले होना तय है क्योंकि, बीते लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के खिलाफ लड़ी स्मृति इरानी ने राहुल गांधी को कड़ टक्कर दी थी. अब विपक्ष का वोट बंटने पर बीजेपी यहां कांग्रेस के किले को ध्वस्त कर सकती है.
बुजुर्ग नेताओं ने दी संयम की सलाह
सूत्रों की मानें तो यूपी की सियासत का पारा बढ़ता देख विपक्षी दलों के बड़े नेताओं ने देर रात फोन पर बात की है. इन सबी नेताओं ने सपा-बसपा और कांग्रेस के आलाकमान से बात करके आपस में रिश्ते खराब ना करने की सलाह दी है.
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