उन्नाव:- मां ने जिस बेटे को बुढ़ापे का सहारा समझा उसने जीवन के अंतिम पड़ाव में दर-दर की ठोकरें खाने के लिए घर से निकाल दिया. सड़क पर बेसहारा पड़ी वृद्धा की आपबीती सुन पुलिस ने बेटे से बात की. बेटे के मुंह मोड़ने पर एक रात के लिए चौकी में शरण दी. अब अपनों से ठुकराई वृद्ध मां को गोसेवक ने अपनाते हुए अंतिम सांस तक अपने साथ रखने की बात कही है.
बेटे ने निकाला बाहर
शहर के मोहल्ला एबीनगर निवासी शिक्षा विभाग के कर्मी के पिता की 35 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी. मां ने पति के हिस्से की 40 बीघा जमीन दो बेटों के नाम कर दी. छोटे बेटे व तीन बेटियों की बीमारी से मौत हो गई. इससे यह शिक्षा विभाग में कार्यरत अपने बड़े बेटे के साथ रहने लगीं. बुजुर्ग मां ने सपने में नहीं सोचा होगा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में बेटा उनके साथ ऐसा करेगा.
राहगीरों ने दिया सहारा
बेटे ने सोमवार रात ई-रिक्शा में मां को बैठाकर उनके सामान (बक्सा-कपड़े) के साथ घर से निकाल दिया. ई-रिक्शा चालक को 100 रुपये देकर कहीं दूर छोड़ने की बात कही. ई-रिक्शा चालक वृद्धा को कुछ दूर सड़क किनारे छोड़कर भाग निकला. बेसहारा वृद्धा को देख राहगीरों ने जानकारी ली. वृद्धा की आपबीती सुनकर सभी स्तब्ध रह गए. सूचना पर पहुंचे जिला अस्पताल चौकी प्रभारी रामजीत यादव ने वृद्धा से जानकारी लेकर बेटे से बात की. बेटा मां को रखने के लिए तैयार नहीं हुआ.
बुजुर्ग को मिला दूसरा जीवन
इस पर पुलिस बुजुर्ग को पुलिस चौकी ले गई. खाना खिलाने के बाद पास के कमरे में सुलाया. सुबह जानकारी होने पर हनुमंत जीवधाम के संरक्षक गोसेवक अखिलेश अवस्थी पहुंचे. वह वृद्धा की पीड़ा सुन भावुक हो गए. उन्होंने वृद्धा को सहारा दिया. जीवन भर अपनी मां की तरह सेवा करने की बात कहकर घर ले गए.
