लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आवारा घूम रही गायों के संरक्षण के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार अब प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 100 क्षमता वाले गोवंश आश्रय स्थल खोलेगी. इन गोवंश आश्रय स्थलों के जरिए गायों की उचित देखभाल की जा सकेगी.
यूपी में ‘गो कल्याण टैक्स’
गायों के रखरखाव और देखभाल के लिए बनने वाले आश्रय स्थलों में आने वाले खर्च के लिए यूपी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की मीटिंग में फैसला लिया गया कि, सरकार गायों के खर्च और रख रखाव के लिए शराब सहित अन्य चीजों पर गो कल्याण टैक्स लगाएगी. इस गो कल्याण सेस के जरिए साल सालभर में करीब 300-400 करोड़ रुपये इकट्ठा हो सकेंगे.
सभी निकायो में गोवंश आश्रय स्थल
राज्य सरकार के प्रवक्ता और उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के मुताबिक प्रत्येक शहरी और ग्रामीण निकाय में अस्थाई तौर पर गोवंश आश्रय स्थल खोलने का प्लान है. जिसमें सभी ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम शामिल रहेंगे. गायों के ये आश्रय स्थल सरकारी जमीन पर बनाए जाएंगे. मनरेगा के जरिए ये आश्रय स्थल बनेंगे इनमें ग्रामीण-शहरी निकायों के अलावा विधायक और सांसद विकास निधि का इस्तेमाल किया जायेगा.
नौकरशाही करेगी निगरानी
योगी सरकार स्थानीय निकायों के लिए करीब 100 करोड़ रुपए पहले ही जारी कर चुकी है. अब गायों के लिए निकायों में बनने वाले आश्रय स्थलों में केयर टेकर भी तैनात किए जाएंगे. जिला लेबल पर जिलाधिकारी और शासन स्तर पर मुख्य सचिव स्तर की स्टेट स्टेयरिंग कमेटी बनाई जाएगी.
इन विभागों से आएगा पैसा
उर्जा मंत्री और सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि, आबकारी विभाग में राजस्व के अलावा सेस लगाया जाएगा. और मंडी परिषद के मंडी शुल्क से होने वाली आमदनी का 2 फीसदी हिस्सा इसमें शामिल होगा. इससे पहले 1 फीसदी राशि ली जाती थी. मुनाफे में चल रहे निर्माण संस्थान, उपक्रम जैसे की राजकीय निर्माण निगम, सेतु निगम, यूपीएसआईडीसी से भी उनके मुनाफे से आधा फीसदी गो कल्याण सेस वसूला जाएगा.
