वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कोर्ट ने पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश दिए हैं. वाराणसी फार्स्ट ट्रैक कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी ने गुरुवार को ये फैसला दिया. उन्होंने सर्वे कराने के लिए एक कमीशन बनाने का आदेश भी दिया है. इससे पहले दो अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. वहीं कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सर्वेक्षण का खर्च सरकार उठाएगी।
मुस्लिम पक्ष ने जताई थी आपत्ति
मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद (ज्ञानवापी मस्जिद पक्ष) और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकीलों ने विवादित ढांचे के पुरातात्विक सर्वेक्षण कराए जाने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी. वहीं मस्जिद पक्ष की दलीलों को दरकिनार कर कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश दे दिए हैं।
आदेश के बाद प्रतिक्रिया
दरअसल, सर्वेक्षण की मांग को लेकर हरिहर पांडे की तरफ से याचिका दायर की गई थी. अदालत के आदेश के बाद हरिहर पांडे ने कहा कि इस फैसले से विश्वनाथ मंदिर परिसर से ज्ञानवापी मस्जिद को हटाने का रास्ता साफ होगा. उन्होंने कहा कि ये एक ऐतिहासिक फैसला है. जिसके लिए हमने लंबी लड़ाई लड़ी है. वहीं मस्जिद की इंतेजामिया कमेटी से जुड़े सैयद यासीन का कहना है कि, वो फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे ।
क्या है विवाद ?
दरअसल, हिंदू पक्ष का दावा है कि, वाराणसी में मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर ऐतिहासिक मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनाई गई थी. हालांकि, 1991 में केंद्र सरकार सभी धर्मस्थलों से जुड़े विवादों में यथास्थिति बनाए रखने के लिए एक कानून लाई थी. इस कानून के तहत 1947 से पहले जो धर्मस्थल जिस स्थिति में था उसी में रहेगा. अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद वाराणासी का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद को भी इसी कानून के तहत सुरक्षा मिली हुई है. इस मस्जिद से किसी तरह की छेड़छाड़ केंद्र सरकार के कानून का उल्लंघन होगा।
