लनखऊ : बुलंदशहर में हुई हिंसा को लेकर पूरे प्रदेश में सियासी भूचाल आ गया है. विपक्ष के नेता बीजेपी की सत्तासीन योगी आदित्यनाथ की सरकार पर प्रहार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है. विपक्ष तो सरकार पर हावी है ही, साथ ही सत्तासीन सरकार के मंत्री भी पार्टी पर तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. बुलंदशहर में हुई हिंसा के लिए बजरंग दल और वीएचपी को जिम्मेदार ठहराते हुए यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि इसके भी वोट की साजिश है.
लोगों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश
राजभर ने कहा कि पूरे यूपी में बजरंग दल और विहिप हिंसा भड़काने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने मामले के आरोप में जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उसमें एक बीजेपी नेता भी शामिल है. प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वह इन सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें.

प्रायोजित थी बुलंदशहर की घटना
मीडिया से बातचीत के दौरान राजभर ने दावा किया कि बुलंदशहर हिंसा की स्क्रिप्ट पहले से ही तैयार थी. उन्होंने कहा कि बुलंदशहर में दंगा कराने के लिए पहले से ही योजना बनाई थी, दंगे के लिए लोगों को भड़काया गया और प्लानिंग के साथ ही सड़क को जाम किया गया.
बुलंदशहर में भीड़ हिंसा का शिकार हुए स्याना कोतवाली के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार राठौर कोई मामूली इंस्पेक्टर नहीं थे. खुलासे पर गौर करें तो साल 2015 में हुए बहुचर्चित बिसाहड़ा के मॉब लिंचिंग के शिकार अखलाक हत्याकांड से इंस्पेक्टर सुबोध कुमार राठौर के कनेक्शन सामने आने लगे हैं. इस मामले से उनका गहरा नाता था. इसी बारे में हम इस खबर में चर्चा करेंगे.
अखलाक मॉब लिचिंग से गहरा नाता
बताया जा रहा है कि मोहम्मद अखलाक जब मॉब लिचिंग का शिकार हुए थे उस दौरान इंस्पेक्टर सुबोध वहां के थाने में तैनात थे. अखलाक के भाई जान मोहम्मद के मुताबिक उनके भाई के साथ मॉब लिंचिंग की घटना होने के दौरान मौके पर सबसे पहले सुबोध कुमार ही पहुंचे थे. जान मोहम्मद ने जानकारी दी कि सुबोध कुमार ही अपनी जीप में घायल अखलाक को अस्पताल लेकर गए थे.
इंस्पेक्टर सुबोध ही अखलाक मॉब लिचिंग केस के पहले जांच अधिकारी थे. जान मोहम्मद ने बताया कि बिसाहड़ा में बीफ के शक में अखलाक की 28 सितंबर 2015 की रात भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया. इस मामले में 18 लोगों को आरोपी बनाया गया. जान मोहम्मद के मुताबिक सुबोध कुमार बेहद संवेदनशील होने के साथ जांच को लेकर उनका रवैया बेहद सहयोगी था. आपको बता दें कि साल 2015 में दादरी के बिलाहड़ा गांव में गौमांस के नाम पर उग्र भीड़ ने वायुसेना कर्मी के 50 वर्षीय पिता मोहम्मद अखलाक और उसके बेटे को उसके घर से घसीटकर भीड़ बाहर ले आयी और ईंटों से पीटा जिससे अखलाक की मौत हो गयी और उसका बेटा गंभीर रूप जख्मी हुआ.
परिजनों में राज्य सरकार के प्रति काफी गुस्सा
पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार राठौर की मौत के बाद उनके परिजनों में राज्य सरकार के प्रति काफी गुस्सा है. इंस्पेक्टर की बहन ने कहा कि उनके भाई को शहीद का दर्जा दिया जाए और गांव में उनके नाम से स्मारक बनवाया जाए. बहन मनीषा ने कहा कि “मैंने भाई खोया है. मुख्यमंत्री गऊ…गऊ.. कर रहे हैं. वो खुद रक्षा नहीं कर पा रहे तो हम लोग क्या करेंगे. शर्म आनी चाहिए उन्हें. एक भी बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमारे परिवार से मिलने की कोशिश नहीं की है. गऊ हमारी माता है. हम मानते हैं लेकिन उस माता के लिए हमारे भाई (सुबोध कुमार) ने अपनी जान दी है.”
