169 रुपए की मूर्तियों से 2 दिन में बनाए 35000 रुपए, फिर ऐसे खुली पोल…

बिना श्रेणी

उन्नाव: शाहरुख की में डायलॉग था कि, ‘कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा धर्म कोई नहीं होता…पठान फिल्म का ये फेमस डायलॉग तो सबको पसंद आया था. लेकिन इस डायलॉग को अपनी ज़िंदगी में उतार लिया उन्नाव के बाप-बेटे ने. इन बाप बेटों ने धर्म के नाम का ऐसा धुंआ उड़ा कि, सारे संस्कार ही धूमिल कर दिए…।

दरअसल, महमूदपुर गांव के रहने वाले एक युवक ने ऑनलाइन ऐप मीशो से मूर्तियों का एक सेट मंगवाया…और उसे खेत में दबा दिया और फिर खुद ही खुदाई कर गांव वालों से बोला कि, ये मूर्तियां खेत में निकली हैं जो कि, सैकड़ों साल पुरानी हैंब मजहब के नाम पर मजमा लगाने में देर कहां लगती है अपने देश में…आस्था के आगोश में लोगों ने मान भी बाप-बेटों का दावा मान लिया…बस फिर क्या देखते ही देखते लोग आने लगे…मूर्तियों पर तिरपाल लगा…और जमकर चढ़ावा चढ़ने लगा…भक्ति भाव में भीड़ भीड़ पहुंचने लगी…पुलिस को जानकारी हुई तो पुरातत्व विभाग को खबर कर दी गई…।

2 दिन में करीब 35 हजार का चढ़ावा भी आ गया था…लेकिन कहते हैं कि, झूठ के पांव नहीं होते…मूर्तियों की बात जब सरेआम हुई तो मूर्तियों की डिलिवरी करने वाले युवक के खुलासे ने अधर्मियों का सारा खेल चौपट कर दिया….इस घटना की तस्वीरें मीशो के डिलिवरी मैन गोरेलाल ने देखीं. तो वो तस्वीरों को पहचान गया…उसने इलाके के थाना प्रभारी को बताया कि मूर्तियां ऑनलाइन ऑर्डर की गई थीं… गोरेलान ने पुलिस से कहा- मैंने इन मूर्तियों को अशोक के यहां पहुंचाया था… उनके बेटे रवि गौतम ने मीशू कंपनी से 169 रुपए में मूर्तियों का सेट ऑनलाइन ऑर्डर कर मंगवाया था…मैंने ही 29 अगस्त को उसके घर ये सेट डिलीवर किया था ।”
फाइनल वीओ- बहरहाल, पुलिस ने अशोक कुमार, उसके बेटे रवि गौतम, विजय गौतम को गिरफ्तार शांति भंग में चालान कर दिया…लेकिन आस्था के खिलवाड़ के इन खलनायकों को अब सब भला बुरा कह रहे हैं…हालांकि, कहने वाले तो ये भी चुटकी ले रहे हैं कि, 169 लगाकर दिन में 35000 कमाने का ऐसा स्टार्टअप…गजब का धंधा था…।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *