लखनऊ: अपनी शुरुआत से ही विवादों के भवंर में रही 68500 शिक्षक भर्ती पर भी आखिरकार खतरे के बादल मंडरा ही गए. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस भर्ती की चयन प्रक्रिया की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने 26 नवंबर तक CBI से प्रोग्रेस इस मामले में रिपोर्ट मांगी है और इस भर्ती की जांच 6 महीने में पूरी करने के आदेश दिए हैं.
12460 सहायक शिक्षक भर्ती पर भी लटकी तलवार
68500 शिक्षक भर्ती की चयन प्रक्रिया की जांच के साथ ही एक और याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 12460 असिसटेंट टीचर के खाली पदों को भी खारिज कर दिया है. और इसकी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया है, यानि 12460 सहायक शिक्षकों की चयन प्रक्रिया और काउंसलिंग दोबारा हो सकती है. 12460 भर्ती के संबंध में कोर्ट ने कहा है कि,
‘21दिसम्बर 2016 के विज्ञापन के आधार पर शुरू हुई12460 भर्ती नियम विरुद्ध है इसलिए इसके चयन को निरस्त या रद्द किया जाता है, सरकार को आदेश किया जाता है कि, भर्ती नियमावली 1981 के आधार पर प्रदेश और जिला स्तर पर विज्ञापन निकालकर 3 महीने के अंदर ये भर्ती पूरी करे योग्य अभ्यर्थियों को काउंसिल में प्रतिभाग कराए’
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68500 भर्ती के पुनर्मूल्यांकन का मौका दिया गया था
मुल्यांकन में गड़बड़ी की शिकायतों के मद्देनजर इससे पहले हाईकोर्ट ने 68500 की इस भर्ती में कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के लिए सचिव परीक्ष सचिव को निर्देश दिए गए थे.
इन कॉपियों में मिली थी गड़बड़ी
रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोप इस हद तक लगे थे कि, जो फेल हैं वो पास कर दिए गए और पास बच्चो बर्ती से बाहर. जांच टीम ने भी अपनी जांच में 343 कॉपियों में बड़ी गड़बड़ी पाई थी. इनमें करीब 51 अभ्यर्थी जो पास थे वो फेल दिखाए गए थे और जो 53 अभ्यर्थी फेल थे वो टीचर बन गए थे.
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सरकार ने की थी बड़ी कार्रवाई
इस परीक्षा के परिणाम में गड़बड़ी की इन खबरों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 सितंबर को बड़ी कार्रवाई करते हुए परीक्षा नियामक प्राधिकारी सुत्ता सिंह को निलंबित करने के साथ ही रजिस्ट्रार जीवेंद्र सिंह ऐरी और शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा को चलता कर दिया था.
