सोमवार से नोएडा-लखनऊ में लागू हो जाएगा ये सिस्टम, फिर बाकी शहरों की बारी!

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लखनऊ/नोएडा: कई दिन से चल रहे कयासों पर अब विराम का वक्त आ गया है. प्रदेश की योगी सरकार ने वो फैसला कर ही लिया है जिसको लेकर चर्चाओं की चाल लखनऊ तक चल रही थी. सरकार ने नोएडा और राजधानी लखनऊ में कमिश्नरी सिस्टम (Commissioner System) लागू करने का पूरा खाका तैयार कर लिया है कैबिनेट की मीटिंग में इस प्रसताव के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा. बता दें कि, कमिश्नरी सिस्टम के चलते नोएडा और राजधानी लखनऊ में अभी तक एसएसपी की तैनाती नहीं की गई है.

सोमवार को है कैबिनेट मीटिंग
अमूमन योगी सरकार की कैबिनेट मीटिंग मंगलवार को होती हैं लेकिन इस बार ये मीटिंग सोमवार को बुलाई गई है. कहा जा रहा है कि, कल की कैबिनेट मीटिंग में लखनऊ और नोएडा में कमिश्नरी सिस्टम (Commissioner System) का प्रस्ताव पास हो जाएगा.

गृह विभाग ने 5 जिलों का प्रस्ताव बनाया है
सूत्रों की मानें तो गृह विभाग ने 5 जिलों में ये कमिश्नरी सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया है. नोएडा (Noida) और लखनऊ (Lucknow)में ट्रायल बेस पर लागू करने के बाद इसे 3 और बड़े शहरों में लागू किया जा सकता है. इन शहरों में कानपुर, इलाहाबाद के नाम बताए जा रहे हैं.

क्या होता है कमिश्नरी सिस्टम?
मामला केवल अधिकार भर का तो नहीं है, बात जिम्मेदारी के कंधों की करें तो कानून व्यवस्था की सारी जिम्मेदारी पुलिस के कंधों पर होती है. ऐसे में अगर उसके हाथ में अधिकार ही नहीं होगे तो कानून के हाथ ना तो लंबे रह सकेंगे औऱ ना मजबूत यही वजह है कि, कमिश्नरी सिस्टम की सिफारिशों का शोर सुनाई दे रहा है. वही मजिस्ट्रेटी सिस्टम के सामने कमिश्नरी सिस्टम (Commissioner System)की बात की जाए तो उसमें ये अंतर हैं

1- ये सिस्टम अंग्रेजों के जमानें का है
2- 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरो में कमिश्नर की नियुक्ति होती है
3-इस लिहाज से नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ बरेली,आगरा,लखनऊ, कानपुर,वाराणसी, इलाहाबाद,झांसी और गोरखपुर में आज ही ये सिस्टम लागू हो सकता है
4- कमिश्नरी सिस्टम में जिला स्तर पर निगरानी के लिए और अधिक सक्षम तंत्र होगा
5-प्रभावी अपराध नियंत्रण जिसमें धारा 144, 107/116 गुंडा एक्ट,गैंगस्टर,पीड़ित पक्ष को शस्त्र लाइसेंस जैसे अधिकार पुलिस के पास।
6- जांच और शिकायतों के लिए DCP और IPS अधिकारी उपलब्ध होंगे
7- छोटे-छोटे कार्यक्षेत्र में बड़े स्तर के अधिकारी निगरानी के लिए उपलब्ध होंगे
8-जिले में नेताओं व जनता को अधिक IPS सीनियर अधिकारी मौजूद होंगे
9- कमिश्नर के पास अधिकार होने से मौके पर तत्काल निर्णय कर सकेंगे
10- साइबर क्राइम, हैकिंग, SWAT, महिला सुरक्षा आदि के लिए अधिक विशेषज्ञ अधिकारी उपलब्ध होंगे
11- पुलिस थानों का प्रभावी संचालन

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