5 राज्य की जनता की जेबों पर महंगाई की मार, बिजली के लिए चुकाने पड़ेंगे ज्यादा पैसे!

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नई दिल्ली : देश में आने वाले दिनों में कोयले से संचालित पावर स्टेशनों की दिक्कतों में इजाफा हो सकता है. स्टेशन के सामने बेहद बड़ी चुनौती सामने आ सकती. जिसके मद्देनजर गुजरात सरकार ने राज्य में टाटा, अडानी और एस्सार पावर कंपनियों को राज्य में बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी करने की छूट देने की पहल की है.

यह चुनौती इस बार विदेशी कोयले के चलते सामने आयी है जिससे निपटने के लिए जहां गुजरात सरकार आम आदमी के बिजली बिल को महंगा करने का रास्ता अपनाने की तैयारी में है. यानि कि जल्द ही प्रदेश की जनता को बिजली में महंगाई झेलनी पड़ सकती है. इतना ही नहीं चुनौतियां महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों के सामने भी खड़ी हो रही हैं और इसकी वजह भी विदेशी कोयला ही है. इन राज्यों के सामने भी एक ही रास्ता बचता है और वो है बिजली के दाम में बढ़ोत्तरी का रास्ता. दरअसल, ये सभी राज्य अपने लिए बिजली की आवश्यकता की पूर्ति का रास्ता टाटा, अडानी और एस्सार के गुजरात स्थित पावर स्टेशन से ही खरीदते हैं जिनके पावर प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 10,000 मेगावॉट है.

बीते कुछ महीनों पर गौर करें तो इस दौरान आंतरिक दबाव बढ़ने की वजह से इंडोनेशिया ने निर्यात होने वाले कोयले की कीमत में आए दिन बढ़ोत्तरी की है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत में तो गिरावट लगातार जारी है जिसकी वजह से इंडोनेशिया को अपने कोयला खदानों के ठप्प होने का डर पैदा हो गया इसी की वजह से इंडोनेशिया सरकार ने निर्यात किए जाने वाले कच्चे कोयले की कीमत लगातार बढ़ा रही है.

गौरतलब है कि इंडोनेशिया ने सितंबर 2010 में कोल माइनिंग और प्राइसिंग फॉर्मूले में बड़ा परिवर्तन किया. इस दौरान इंडोनेशिया का कोयला अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे सस्ता था. जिससे भारतीय निजी पावर कंपनियों ने इंडोनेशिया के सस्ते कोयले के लिए अपना संयंत्र लगाया लेकिन जैसे ही फॉर्मूले बदले गए भारतीय कंपनियों के सामने दिक्कतें और खतरा सामने आने लगे. खतरा ये कि भविष्य में जब भी इंडोनेशिया कोयले की कीमत में बड़ा इजाफा करेगा तब भारतीय कंपनियों के सामने अस्तित्व का संकट बनेगा. जिसे देखते हुए कुछ महीनों से इंडोनेशिया में कच्चे कोयले की कीमत बढ़ने के बाद से ही गुजरात सरकार ने जुलाई में उच्च स्तरीय समिति बनायी. जिसने इंडोनेशिया में बढ़ती कीमतें और 2010 में फॉर्मूले में हुए परिवर्तन के हवाले से निजी क्षेत्र की तीनों कंपनियों को बिजली की मौजूदा दरों में बढ़ोत्तरी करने की सलाह दी.

आपको बता दें कि इन सभी पॉवर प्रोजेक्ट्स को अब केवल एसबीआई से ही उम्मीद है. एसबीआई ने उच्च स्तरीय समिति को बताया कि ये सभी बिजली संयंत्र घाटे का सामना कर रहे हैं. इन्हें प्रमोटरों के अलावा निवेश के सहारे चलाया जा रहा है. देश के बड़े बैंक का दावा है कि इस वक्त के हालात में इन पावर कंपनियों के साख का गिरना तय है. इतना ही नहीं ये नॉन परफॉर्मिंग प्लांट होने की कगार आ चुकी हैं. बैंक ने ये तक दावा किया कि इनके डूबते ही इन्हें कर्ज देने वाले बैंक को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा.

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