इस लाकडाउन समय मे एक ही शहर मे रहने के नाते मुझे अपनी मां और सासू मां दोनो के साथ रहने को और बहुत कुछ सीखने समझने को मिला..इस अनुभव को मै कविता के माध्यम से बताना चाह रही हूं……।

धरती पर मां ही तो होती है..
ईश्वर का स्वरुप
जिसके बिना जीवन का
ना कोई रंग ना रुप..
हूं मै खुशकिस्मत
सानिध्य है दो मांओ
का मेरे पास,
इक है मेरी मां तो दूजी सासू मां
मेरे लिए तो दोनो ,
एक ही सिक्के के दो रूप..
मां से सुने पुराने किस्से,
कुछ उनके कुछ मेरे बचपन की
रीति रिवाज और भविष्य का
सासू मां से मिला दिशा निर्देश
शायद मै कुछ बन जाउं
आपकी सीख के परिणाम स्वरूप …

बस इतना कहना है इनसे
मेरे लिए हो आप दोनो खास
अपना आशीर्वाद बनाए रखना
सदा रहना हमारे पास
आप ही तो हमारे लिए
साक्षात भगवान का रूप….
कलमकार- सुगन्धा त्रिपाठी, गोरखपुर
( सुगन्धा त्रिपाठी गोरखपुर की कलमकार है अपनी कलम के कौशल और शब्दों की शैली से हर रचना में शानदार रंग भरती हैं https://apnauttarpradesh.co.in परिवार उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है)
