प्रयागराज: संस्कृति का शंखनाद, समर्पण का समंदर और सतरंगी सैलाब. आस्था का ये वो महासंगम है, जो इन दिनों संगम की रेती पर भव्य भारत के दर्शन करा रहा है. 13 अखाड़ों का नगाड़ा, हाथी-घोड़ा-पालकी और पैदल वालों की टोली. कुंभ का हर एक रंग देखर आप दंग रह जाएंगे. क्योंकि, दुनिया के किसी देश में ऐसा समागम देखने को नहीं मिलता. जहां करोड़ों लोग एक साथ एक जगह पर आते हों.

कुंभ में आएंगे 15 करोड़ लोग
ये आस्था कि, गहरी जड़ों का ही तो जुड़ाव है जहां करोड़ों लोगों का जमावड़ा लग रहा है. 49 दिनों के इस कुंभ में करीब 15 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे. और ये इतनी बड़ी संख्या है कि, इनके रुख से केंद्र में सरकार बनाने का रास्ता बन सकता है और शायद यही वजह है कि, 2019 के महासर में जाने से पहले पूरी बीजेपी कुंभ के जरिए वोट मंथन में जुट गई है.

धर्म संसद में राममंदिर
वीएचपी और संघ भी आस्था और अध्यात्म के साथ राजनीति का रिश्ता मजबूत करने में लगे हैं. 31 जनवरी से होने वाली धर्म संसद में राममंदिर सहित तमाम मुद्दों पर मंथन होगा. संघ प्रमुख मोहन भागवत भी इस संगम में शिरकत करने आएंगे. कुंभ में देश के कौने-कौने से करोड़ों लोग पहुंचेंगे. ऐसे में तमाम सुविधा और सहूलियत के साथ सरकार की कवायद है कि, धर्म की ध्वजा के साथ 2019 में भी बीजेपी का झंडा बुलंद रहे. धर्म संसद में भी करीब 5 हजार साधु-संत रहेंगे.

योगी सरकार की मुहिम
योगी सरकार ने साधु-संतो और श्रद्धालुओं का दिल जीतने के लिए प्रथम शाही स्नान पर हवाई जहाज से पुष्पवर्षा कराई है. सूबे की योगी सरकार ने कुंभ में आने के लिए 6 लाख गांव के साथ 10 करोड़ लोगों को मोबाइल पर न्यौता भेजा था… कुंभ पहुंचे रामनाथ कोविंद भी कुंभ जाने वाले दूसरे राष्ट्रपति हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने संगम जाएंगे. आस्था के साथ-साथ संगम की रेती पर सियासत का मंथन हो रहा है. बीजेपी और सहयोगी संगठन शिद्दत से जुटे हैं. और बाकी दल इससे दूर दिखाई दे रहे हैं. इसलिए 15 करोड़ लोगों के संगम में सवाल उठता है कि, क्या बीजेपी कुंभ में खोज लेगी 2019 का फॉर्मूला. क्या कुंभ से निकलेगा 2019 में बीजेपी के लिए वोट.
