नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों के कायराना हमले से पूरा देश हलकान है. पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ बेहद गुस्सा है. हर कोई पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने की मांग कर रहा है. पूरा देश एक सुर में बस एख ही बात कह रहा हैकि, बदला लिया जाए. तिरंग में लिपटे शहीदों के शव जब उन घरों में पहुंच रहे हैं तो ये गम के बीच बदले का ये आक्रोश आसमान छूने लगता है. 40 से ज्यादा इन शहीदों में करीब 12 जाबांज उत्तर प्रदेश के भी हैं. इस माहौल में अपना उत्तर प्रदेश की टीम जहां जहां गई वहां बस एख ही मांग थी ‘हमें बदला चाहिए ‘
इस हमले में किसी ने अपना बेटा खोया किसी ने भाई किसी पति किसी ने अपना पिता. बावजूद इसके शहीदों के परिवार देश के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने को तैयार हैं. कुछ परिवार ऐसे भी मिले कि, एक तरफ अपने शहीद लाल का इंतजार कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ आतंकियों का सफाया करने के लिए अपने दूसरे बच्चों को भी सेना में भेजने का साहस दिखा रहे हैं. देश उनके जज्बे को सलाम कर रहा है.
‘आतंकियों से लड़ने भेजूंगा दूसरा बेटा’
ये जज्बा है चंदौली के बहादुरपुर गांव के शहीद अवधेश यादव के पिता हरिकेश यादव का, बेटे की शहादत पर वो कहते हैं कि, ‘कमजोर पड़ा हूं लेकिन टूटा नहीं हूं आतंकियों का फन कुचलने के लिए अपने दूसरे बेटे बृजेश को भी फौजी बनाउंगा, मुझे गर्व है कि, मेरा बेटा अवधेश तिरंगे की शान में शहीद हुआ है. शहीद अवधेश की कैंसर पीड़ित मां रो-रोकर अपने बेटे को पुकारती दिखीं. यहां हर आंख में आंसू था गम और गुस्सा था.
‘बेटा कहता था मां तेरा नाम रोशन करूंगा’
मैनपुरी के विनायकपुर में शहीद रामवकील माथुर की बूढी मां गीता देवी घर के बाहर जुटी भीड़ को देखकर कहती हैं कि, बेटा यही कहता था कि, मां तेराम रोशन कर दूंगा. रोते रोते वो बेटे को पुकारती हुई कहती हैं बेटा देख आज घर के बाहर बहुत भीड़ है तू तो दुनिया में नाम रोशन करके चला गया. लेकिन मुझे तो अकेला छोड़ गया. 4दिन पहले ही बेटा घर से ड्यूटी पर गया था.
‘बेटे पर गर्व है लेकिन सरकार बदला ले’
महराजगंज के गांव हरपुर टोला के शहीद पंकज क 10 फरवरी को ही घर से गए थे. शहादत की खबरके पूरा गांव उनके घर पर उमड़ा है. शहीद प्रदीप का चार साल का बेटा अपनी छोटी-छोटी उंगलियों से सबको चुप कराता दिखा उस मासूम को शायद पता भी नहीं था कि, देश की खातिर उसके पिता का साया उसके सिर से उठ गया है. शहीद पंकज के पिता कहते हैं कि, सरकार को इस हमल ेका जवाब बिना समय गवाए देना चाहिए.
‘बेटा शहीद हुआ अब मैं दुश्मनों से लड़ना चाहता हूं’
देवरिया के छपिया जयदेव के शहीद विजय कुमार मौर्य के पिता रामायण सिंह कहते हैं कि, सरकार इजाजत दे तो मैं सेना में जाकर बेटे की शहादत का बदला लेने को तैयार हूं. विजय कुमार दो दिन पहले ङी घर से हैडक्वार्टर पहुंचे थे.
‘हमारे राम नहीं रहे तो हम जीकर क्या करेंगे’
वाराणसी के तोफापुर के शहीद रमेश यादव की पत्नी के शब्द वहां मौजूद हर किसी के केलजे को चीर रहे थे. पत्नी रेणु रो-रोकर पुकार रही थी कि, जब ‘हमारे राम नहीं रहे तो हम जीकर क्या करेंगे, हमें भी उनकी चिता के साथ सुला दो’
‘बेटी बोली सरकार पापा की मौत का बदला ले’
उन्नाव के शहीद अजीत की शहादत पर पूरे शहर में शोक की लहर देखी गई. गुस्साए लोगों ने पाक्स्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए. शहीद अजीत की 10 साल की बेटी श्रेया का रो-रोकर बुरा हाल था. पिता की तस्वीर सीने से लगाए सीढ़ियों पर बैठी श्रेया लड़खड़ाती आवाज में सरकार से मांग कर रही थी कि, सरकार ठोस कदम उठाए उनके पिता की शहादत बेकार ना जाएं.
‘खून के बदले खून चाहिए’
दुख की इस घड़ी में हर आंख में आसूं हर चेहरे पर गम और गुस्सा है. आगरा के कहरई गांव के शहीद कौशल कुमार रावत की शहादत पर परिवार की मांग है कि, उन्हें खून के बदले खून चाहिए.
