गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur) शहर में कानपुर (Kanpur) के एक युवक मनीष गुप्ता की मौत (Manish Gupta Death Case) मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस केस में पुलिस की भूमिका पर शुरू से ही संदेह व्यक्त किया जा रहा था. पुलिस मनीष गुप्ता की मौत को हादसा बता रही थी, वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस की पोल खुल गई है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि सिर, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट के निशान हैं. सिर के अगले हिस्से पर तेज प्रहार किया गया, जिससे उनके नाक के पास से खून बह रहा था.
मनीष गुप्ता अपने दो दोस्तों हरदीप सिंह चौहान और प्रदीप सिंह चौहान के साथ गोरखपुर घूमने गए थे. यहां होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे थे. हरदीप के अनुसार आधी रात पुलिस होटल में चेकिंग करने पहुंची. मनीष को सोते हुए जगाया तो उन्होंने पूछा इतनी रात में चेकिंग किस बात की हो रही है? क्या हम आतंकी हैं? इस पर पुलिसवालों ने उसे पीटना शुरू दिया. इसके बाद घायल मनीष को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
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मामले में विरोध के स्वर उठे तो मृतक की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता की तहरीर पर रामगढ़ ताल थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज किया गया. वहीं एसएसपी ने लापरवाही बरतने पर रामगढ़ताल थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया था. जबकि मुख्यमंत्री अनुकंपा कोष से मृतक व्यापारी की पत्नी को 10 लाख की आर्थिक सहायता का चेक भी दिया गया है. वहीं मृतक व्यापारी मनोज गुप्ता का पोस्टमार्टम होने के बाद शव को उनके परिजनों को सौंप दिया गया.
