लॉकडाउन के चलते बेसहारों के हक़ पर कुंडली मारे बैठें हैं सरकारी जनप्रतिनिधि

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कानपुर:- कोरोना वायरस के चलते आज पूरे देश में लॉकडाउन घोषित है, जिसका असर अब साफ दिखने को मिल रहा है. इसका असर पूरे देश में सामान्य जनजीवन पर तो पड़ा ही रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा वो गरीब मजदूर इससे प्रभावित हो रहे है, जिनका जीवनयापन रोज की दिहाड़ी से होता है. ऐसे दिहाड़ी मजदूर जो रोजाना 100-200 रुपये कमाते थे पर आज इन मजदूरों के पास अपने बच्चों और परिवार को खिलाने के लिए राशन तक नहीं हैं. प्रधानमंत्री द्वारा की गई पहल “कोई भूखा ना सोए” अब सिर्फ सोशल मीडिया पर ही फर्राटा भर रही है.

18 मई से लॉकडाउन-4

राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि लॉकडाउन का चौथा चरण यानी लॉकडाउन- 4.0 पूरी तरह नए रंग रूप व नए नियमों वाला होगा. राज्यों से मिल रहे सुझाव के आधार पर लॉकडाउन-4.0 से जुड़ी जानकारी भी 18 मई से पहले दे दी जाएगी. प्रधानमंत्री की इस बात से इतना तो स्पष्ट हो गया है कि 17 मई के बाद लॉक डाउन तो बढ़ेगा पर शायद कुछ राहतों के साथ. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में बजट पेश कर दावा किया गया था कि इस बजट में समाज के लगभग हर वर्ग के लिए कुछ ना कुछ ऐलान किए गए हैं. प्रधानमंत्री ने भी इस बजट को जन-जन का बजट बताया था. बजट के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा था कि बजट में किसान से लेकर छात्र, महिला से लेकर कारोबारी तक को राहत देने का प्रयास किया गया है.

इंतजाम हो रहे फेल

प्रधानमंत्री ने इस बजट में सभी को ध्यान में रख्खा परंतु आज भी पलायन करने वाले मज़दूरों पर किसी की नज़र नही पड़ी. हालात तो ये हैं कि अब हज़ारो लोग कहीं भूख से दम तोड़ रहे हैं तो कहीं मिलों चल कर परेशान होने के बाद आत्महत्या कर रहे हैं. जबकि प्रधानमंत्री के आदेशों के बाद मंदिर, मस्जिद, चर्च, स्कूल सभी आज भी बंद पड़े हैं परंतु चमक रही है तो सिर्फ मधुशाला. सरकार द्वारा दिए गए आदेशों के बाद अब मैखानों में सोशल डिस्टनसिंग की धज्जियां खुलेआम उड़ती दिखाई दे रही है. ठेका मालिक ना तो सेनेटाइजर का प्रयोग कर रहे और ना ही सुरक्षा का धयान रख रहे हैं जिसके चलते कोरोना संक्रमण देश मे अपने पैर पसारता जा रहा है. चंद पैसों की लालच में लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़ अभी भी जारी है. अब देखना यह है कि सरकार ऐसे बेसहारा मज़दूरों के लिए क्या कदम उठाती है, या हर बार की तरह इस बार भी मज़दूरों को राम भरोसे छोड़ने की तैयारी है.

अपना उत्तर प्रदेश के लिए कानपुर से वरिष्ठ संवाददाता फैज़ान हैदर के साथ आरिफ़ा खातून की रिपोर्ट।

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