वाराणसी/लखनऊ: आखिरी चरण के चुनाव में राजनीतिक का सबसे बड़ा केंद्र अब काशी ही है. काशी के सहारे तमाम सियासी दल अब पूरे पूर्वांचल की उन 13सीटों पर समीकरण सिद्ध करना चाहते हैं जो आखिरी चरण में बाकी रह गई है. लेकिन सब इस जद्दोजगद में लगे हैं कि, पहले वाराणसी की सीट पर किसी तरह से कब्जा जमाया जाए. पीएम मोदी के लिए भी वाराणसी में 2014 जैसे हालात नहीं है. 2014 में मोदी को एकतरफा जीत मिली थी लेकिन इस बार कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन सभी जोर लगा रहे हैं. विपक्ष की दलील है कि, बीजेपी यहां अजेय नहीं है 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के दिग्गज मुरली मनोजहर जोशी बड़ी मशक्कत के बाद करीब 17 हजार वोटों से जीते थे और तब भी विपक्ष अलग-अलह लड़ रहा था.
रोड शो के बाद अब मोदी का डेरा
वाराणसी सीट पर सियासी संग्राम की भनक तो तभी तेज हो गई थी जब बर्खास्त सेना के जवान तेजबहादुर ने पीएम मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला. हालांकि, तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने से उन्हें राहत की सांस जरुर ली होगी. काशी को मथने के लिए पीएम मोदी ने नामांकन से पहले यहां मेगा रोड शो किया. नामांकन के दिन भी वाराणसी में मोदी-मोदी ही छाए रहे. अब 16 तारीख से पीएम मोदी फिर अपने क्षेत्र में डेरा डालने जा रहे हैं. इस दौरान वो बाबा विश्वनाथ के दर्शन के अलावा नगर भ्रमण भी कर सकते हैं.
प्रियंका गांधी ने संभाली कांग्रेस की कमान
तेज बहादुर के समय कयास लगाए जा रहे थे कि, कांग्रेस एन वक्त पर अपने प्रत्याशी अजय राय को हटाकर गठबंधन के प्रत्याशी तेजबहादुर के लिए रास्ता साफ कर सकती है. लेकिन तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने से कांग्रेस ने अजय राय के लिए प्रचार तेज कर दिया. खुद प्रियंका गांधी ने 15 तारीख को पूरे तेवर के साथ रोड शो करके अपने इरादे जता दिए. प्रियंका गांधी के रोड शो में भी अच्छी भीड़ देखने को मिली. इस रोड शो ने कांग्रसजनों के उत्साह को भी बढ़ा दिया है. प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी की तरह करीब 7 किमी लंबा रोड शो किया था. भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय की मूर्ति पर माल्यार्पण करके गोदौलिया तक रोड शो किया और काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना भी की.
अखिलेश मायावती ने संभालेंगे मैदान
पीएम मोदी और प्रियंका गांधी के बाद सबकी नजरें सपा-बसपा के गठबंधन पर जमी थीं कि, वाराणसी में गठबंधन का प्लान क्या है. क्या तेजबहादुर के नामांकन रद्द होने के बाद सपा-बसपा वाराणसी सीट पर केवल उम्मीदवार खड़ा करने की औपचारिकता निभाकर रह जाएंगे. लेकिन चुनाव प्रचार की समाप्ति से पहले सपा-मुखिया अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती और चौधरी अजीत सिंह संत रविदास मंदिर के समागम स्थल पर महारैली करने जा रहे हैं. इतना वाराणसी से सटे चंदौली में भी 17 मई को गठबंधन की बड़ी रैली है. इससे पहले 13 मई को ये गठबंधन गाजीपुर में एक बड़ी रैली करके अपने इराद जता चुका है.
क्या है वाराणसी का गणित…
वाराणसी लोकसभा सीट पर 17 लाख 96 हजार 931 मतदाता हैं
करीब 3.5 लाख वैश्य वोटर हैं
2.5 ब्राह्मण
3 लाख से ज्यादा मुस्लिम
1.5 लाख भूमिहार
1 लाख राजपूत
2 लाख पटेल
80 हजार चौरसिया
3.5 लाख ओबीसी
1 लाख दलित वोटर हैं
