लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले की गोला उपचुनाव की जीत से उत्साहित भाजपा. अब मैनपुरी और रामपुर का रण जीतने की रणनीति में जुट गई है. इन दोनों सीटों पर 5 दिसंबर को चुनाव होना है और 8 दिसंबर को मतगणना. वहीं खबर ये है कि, मैनपुरी सीट पर डिंपल यादव, शिवपाल यादव, धर्मेंद्र यादव सहित तमाम नामों की चर्चाओं के बीच तेज प्रताप यादव का नाम फाइनल हो गया है. यानि तेज प्रताप यादव मुलायम सिंह की सियासी विरासत संभालेंगे. बता दें कि, तेज प्रताप पहले भी मैनपुरी सीट से सांसद रह चुके हैं ।
क्या है समीकरण…
अब सिलसिलेवार तरीके से इन दोनों सीटों का रण और समीकरण समझें तो, मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी सीट…1996 से ही समाजवादी पार्टी के पास रही है…परिवार और प्रतिष्ठा से जुड़ी इस सीट को समाजवादी पार्टी किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती है. गढ़, जातीय समीकरण और सहानुभुति सपा के लिए जीत का सबब साबित हो सकती है।
मैनपुरी जीतने के लिए BJP का प्लान
विधानसभा चुनाव में यादव लैंड में सेंध लगा चुकी बीजेपी.सपा के गढ़ मैनपुरी में कमल खिलाने की खास रणनीति को धार देने में लगी है. इसी कड़ी में बीजेपी ने जो प्लान अभी तक तैयार किया है वो ये है कि,…
1- पार्टी ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को मैनपुरी लोकसभा सीट की कमान सौंपी है ।
2- जिले की सभी 5 विधानसभाओं के कार्यकर्ताओं की एक अहम बैठक बुलाकर राय ली गई है ।
3- CM योगी समेत BJP के बड़े नेता मैनपुरी में अखिलेश यादव को घेरेंगे ।
4- यादव परिवार में सेंधमारी कर अपर्णा यादव को भी मैदान में उतार सकती है बीजेपी
रामपुर के रण में आजम की साख का सवाल
मैनपुरी में जहां यादव परिवार की परीक्षा है तो वहीं तमाम मुसीबतों के बीच आजम खान के लिए भी रामपुर का रण, खुद की सियासत का आखिरी इम्तिहान सरीखा है. 1980 के दशक से रामपुर की राजनीति में एकछत्र राज करने वाले आजम खान की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई इस सीट पर 5 दिसंबर को चुनाव है. हालांकि, सदस्यता रद्द होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आजम खान की अपील पर अभी 9 नवंबर को सुनवाई होनी है. मुस्लिम बहुल इस सीट पर बीजेपी 12 नवंबर को एक बड़ा ‘मुस्लिम सम्मेलन’ भी करने जा रही है. जिसमें मुख्तार अब्बास नकवी समेत कई नेता शामिल होंगे।
MY- समीकरण की भी परीक्षा
रामपुर और मैनपुरी महज दो सीट नहीं हैं, बल्कि यू समझ लीजिए कि, समाजवादी पार्टी की सियासत के वो केंद्र बिंदु हैं, जहां MY समीकरण के फॉर्मूले की भी जांच होनी है. दोनों परिवारों की प्रतिष्ठा के प्रश्न के साथ ही सवाल ये भी है कि, दोनों सीटों पर सपा के लिए सहानुभुति आएगी काम या बदली हुई नीति बीजेपी को जिताएगी संग्राम?
