SPECIAL REPORT: बीजेपी शासन में ही क्यों बढ़ी मॉब लिचिंग, कहां से आती है भीड़, क्या कहता है कानून

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मॉब लिंचिंग ये शब्द आजकल काफी चर्चाओं में है. इससे जुड़ी खबरें आजकल काफी सामने आ रही. कभी गौरक्षा के नाम पर, कभी धर्म के नाम पर, कभी छेड़छाड़ की वजह से तो कभी चोरी के शक में किसी ना किसी वजह एक भीड़ मिलकर कई लोगों को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार चुकी है. रोजाना इससे जुड़े काफी किस्से सामने आ रहे है. ऐसे में सबके मन में ये सवाल आता होगा कि आखिर ये मॉब लिंचिग की भीड़ आती कहां से है और कौन इस भीड़ को इकट्ठा करता है?

क्या है मॉब लिंचिंग?
मॉब लिंचिंग का अर्थ है भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दिया जाना. हाल ही में देश में इसके कई किस्से सामने आए. कई बार चोरी के शक में तो कई बार धर्म के चक्कर में कई लोगों की एक भीड़ ने जान ले ली है. इसके पीछे झूठी अफवाहों का भी हाथ रहा है. इन अफवाहों के चलते ही ये मॉब लिंचिंग की भीड़ कई लोगों को मौत के घाट उतार चुकी है.

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कहां से आती है इतनी भीड़?
मॉब लिंचिग की घटनाएं सुनने के बाद हर किसी के मन में ये सवाल आता ही होगा कि अचानक इतने सारे लोगों को एक जगह पर होने वाली घटना का पता कैसे चल जाता है? कैसे ये भीड़ एकत्र होकर लोगों को मौत के घाट उतार देती है? एक रिसर्च के दौरान पता चला है कि ये एक समाजिक मनौविज्ञान घटना है, जिसके लिए पहले लोगों को किसी विषय पर जबरदस्ती भड़काया और उकसाया जाता है और फिर उसके इस गुस्से का इस्तेमाल करके ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जाता है. लोगों को धर्म के नाम पर, गौरक्षा के नाम पर, देशभक्ति के नाम पर भड़काया जाता है जिसके बाद ये लोग मॉब लिंचिंग भीड़ का हिस्सा बन जाते है.  आजकल सोशल मीडिया इसमें अहम रोल निभाती नजर आ रही है. कई बार सोशल मीडिया के जरिए ये भीड़ एकत्र हो जाती है.

 

क्या कहता है कानून?
सुप्रीम कोर्ट मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर बेहद सख्त है. एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के लिए गाइडलाइन तक जारी कर चुका है. जिसमें कोर्ट ने कहा था कि हर नागरिक की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है. संविधान के अनुच्छेद 21 में हर नागरिक को जीवन का अधिकार मिला हुआ है और कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना किसी के जीवन को छीना नहीं जा सकता है. इसका मतलब ये हुआ कि अगर किसी ने अपराध किया है तो उसको कानून के दायरे में लाकर ही सजा दी जाएगी.

मॉब लिंचिंग के मामले में सबसे पहले पुलिस आईपीसी की धारा 153 A के तहत मामला दर्ज करती है. जिसमें 3 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा आईपीसी की धारा 34, 147, 148 और 149 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. अगर भीड़ द्वारा किसी की पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है, तो आईपीसी कि धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा और साथ में धारा 34 या 149 लगाई जाएगी. इसके बाद जितने भी लोग इसमें शामिल होते है उन सबको हत्या का दोषी माना जाएगा जिसके तहत फांसी या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा. इसके अलावा सभी पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

मॉब लिंचिंग पर बनना चाहिए और सख्त कानून?
मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए क्या इस पर और सख्त कानून बनने की जरूरत है. कई बड़े नेता इस पर सख्त कानून बनाने की बात कर चुके है. एआईएमआईएम के प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी इस मुद्दे पर अक्सर सरकार पर सवाल उठाते आए है और साथ ही वो केंद्र सरकार से मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए नए कानून की भी मांग कर चुके है. कुछ दिनों पहले ओवैसी ने कहा कि सरकार इसको रोकने के लिए कानून क्यों नहीं बना रही है? वो किसको बचाना चाह रहे हैं? हिंदुस्तानियों की जान जा रही है, चाहे मजहब किसी का कुछ भी हो…मारने वाले को किसी का डर नहीं है. जब इसके लिए नया कानून बनेगा, लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी तब लोगों में खौफ पैदा होगा. इसकी बढ़ती घटनाओं को देखते हुए कानून बनाना काफी जरूरी हो गया है.

मोदी सरकार में बढ़ी मॉब लिंचिंग?
2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार के सत्ता में आने के बाद मॉब लिंचिंग की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ. पिछले कुछ सालों में इसकी घटनाएं यकीनन काफी बढ़ी है. इस मुद्दे को लेकर अक्सर विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिल जाता है. मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने में मोदी सरकार पूरी तरह से नाकाम नजर आ रही है. कुछ समय पहले आए एक सर्वे के मुताबिक मई 2014 से मॉब लिंचिंग की कुल घटनाओं में 97 फीसदी की वृद्धि हुई है.

मॉब लिंचिंग की कुछ ताजा घटनाएं

झारखंड-

झारखंड से रविवार को एक बार फिर मॉब लिंचिंग की घटना सामने आईं थी. ये घटना झारखंड के गुमला इलाके की थी जहां डायन बताकर महिला समेत 4 लोगों की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इस मामले में करीब 12 लोगों पर हत्या का आरोप है. हत्या की इस घटना को रविवार की सुबह 3 बजे अंजाम दिया गया.

इससे पहले जून 2019 में झारखंड में मॉब लिंचिंग का एक और मामला सामने आया था. जहां भीड़ ने 24 साल के तबरेज अंसारी को चोरी के आरोप में पीटकर मार डाला था. उनकी हत्या सरायकेला खरसांवा जिले के घातकीडीह गांव में हुई थी. पहले उन्हें बिजली के पोल से बांधकर पीटा. फिर उनसे जय श्री राम और जय हनुमान के नारे लगवाए थे. अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था.

बिहार-

2 दिन पहले बिहार के हाजीपुर में मॉब लिंचिंग की दो घटनाएं सामने आई थी. एक घटना में भीड़ ने लुटेरे की पीट-पीटकर हत्या कर दी तो दूसरे में भीड़ ने चोरी के आरोप में पति-पत्नी को पीट दिया. हाजीपुर में बैंक के 2 लुटेरे बैंक लूटने आए थे लेकिन वो इसी बीच लुटेरे ग्रामीणों के हत्थे चढ़ गए. जिसके बाद गांववालों ने लुटेरों को पकड़ लिया और मौके पर ही पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था. इसके अलावा दूसरी घटना सदर थाना क्षेत्र के हरौली में मंदिर की थी जहां पूजा के दौरान शोर हुआ कि किसी महिला के गले की चेन चोरी हो गई. लोगों ने मंदिर में मौजूद एक महिला को पकड़कर उसकी पिटाई शुरू दी. महिला के पति के पहुंचने के बाद लोगों ने दोनों पति-पत्नी की पिटाई की. लोगों ने उस दम्पति को बहुत बूरी तरह मारा.

मध्य प्रदेश-

19 जुलाई को मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक मोर का शिकार करने पर शख्स की पिटाई का मामला सामने आया था. भीड़ ने उस शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी. दरअसल, ग्रामीणों ने मोर चुराने आए चार चोरों को देखा. इसमें से तीन चोर भागने में कामयाब हो गए, जबकि एक चोर को लोगों ने पकड़ लिया और उसकी बुरी तरह पिटाई की. शख्स के पास शिकार किए हुए चार मोर की लाशें मिली थीं, जिसे देखकर गांव वाले भड़क गए. इसके बाद उन लोगों ने चोर की इतनी पिटाई की कि उसकी मौत हो गई.

राजस्थान-

कुछ दिनों पहले राजस्थान से मॉब लिंचिंग का एक मामला सामने आया था. राजस्थान के अलवर के थलसा गांव में एक युवक की भीड़ ने इस कदर पिटाई की कि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. ये मामला 18 जुलाई का है. जब वो शख्स बाईक से कहीं जा रहा था. तभी चौपानकी पुलिस स्टेशन के पास उसकी बाइक एक बुजुर्ग महिला से टकरा गई. इसके बाद लोगों की भीड़ एकत्र हो गई है और पीट-पीटकर उसको अधमरा कर दिया.

राजस्थान में इससे पहले भी लोग मॉब लिंचिंग का शिकार हो चुके है. अलवर के पहलू खान को 2017 में भीड़ ने पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था. ये मामला काफी सुर्खियों में रहा था. इलाज के दौरान पहलू खान की मौत हो गई थी. पहलू खान पर गोतस्करी का शक था.

कब रुकेगी मॉब लिंचिंग?

मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आने के बाद हर कोई ये सोचता है कि आखिर कब इस तरह की घटनाएं रुकेगी? क्या सरकार इसके लिए कोई नया कानून लाऐगी? इस मामले में बेहद जरूरी है कि लोगों जागरूक हो, वो किसी भी तरह के भड़काने में ना आएं और ना हीं के भड़काऊ सोशल मीडिया के मैसेज  को आगे फॉरवर्ड करें. लोग धर्म के नाम पर अपनी सोच को जागरूक करे. मॉब लिंचिंग की घटनाएं कब रुकेगी ये तो फिलहाल नहीं कहा जा सकता लेकिन इन घटनाओं को रोकना काफी जरूरी है. एक भीड़ का मिलकर लोगों को मार देना काफी शर्मनाक है.

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