उत्तरप्रदेश में पुरानी पेंशन को लेकर सड़क पर उतरे लाखों कर्मचारियों का आंदोलन सरकार के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है. क्योंकि, ये आंदोलन लगातार तेजी पकड़ रहा है. सरकार से बातचीत बनतीजा रहने के बाद अब इन लाखों कर्मचारियों ने 3 दिन की हड़ताल की घोषणा की है.
बता दें कि, बीते दिनों पेंशन बहाली मंच के बैनर तले राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में यूपी के लाखों कर्मचारियां का जमावड़ा लगा जिसमें शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के कर्मचारी शामिल हुए. इनकी हड़ताल को देखकर सरकार की तरफ से डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा से इनकी मीटिंग हुई लेकिन कोई लिखित आश्वासन ना मिलन ये कर्मचारी मायूस लौट आए.अब इन हड़ताली कर्मचारियों ने 25 से 27 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में हड़ताल का ऐलान किया है.
क्यों हड़ताल पर अड़े हैं कर्मचारी?
दरअसल ये लाखों लाख कर्मचारी न्यू पेंशन स्कीम (NPS) का विरोध कर रहे हैं और पुरानी पेंशन लागू करने की मांग कर रहे हैं. 2004 में केंद्र सरकार और 2005 में यूपी सरकार ने पुरानी पेंशन बंद करके नई पेंशन स्कीम शुरू की थी.
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नई और पुरानी पेंशन योजना मे क्या अंतर है?
1- नई और पुरानी पेंशन योजना में क्या अंतर है?
पुरानी पेंशन में हर साल डीए जोड़ा जाता था
2- नई पेंशन में डीए नहीं जोड़ा जाता
पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी का कटा हुआ पैसा सरकारी खजाने में जाता था
3- न्यू पेंशन योजना में पैसा शेयर मार्केट में लगाया जाता है
पुरानी स्कीम में रिटायर होने वाले कर्मचारी अधिकारी की आखिरी सैलरी की आधी रकम
4- आजीवन हर महीने पेंशन के तौर पर मिलती थी
न्यू पेंशन योजना में हर महीने पेंशन नहीं मिलती
5- पुरानी पेंशन में मूल वेतन का 10% जीपीएफ कटता था रिटायर होने पर कुल जमा राशि कर्मचारी को मिलती थी
नई व्यवस्था में जीपीएप अकाउंट बंद कर दिए गए हैं.
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कर्मचारी क्यों कर रहे हैं पेंशन का विरोध?
कर्मचारियों-अधिकारियों का विरोध शेयर मार्केट के सिस्टम को लेकर है.जैसे कि, किसी कर्मचारी ने 1 लाख रुपए जमा किए.रिटायर होने के दिन शेयर मार्केट में उसके 1 लाख की कीमत अगर 10 हजार है तो उसे 6 हजार रुपए मिलेंगे और बाकी के 4 हजार में उसे बीमा कंपनी से पेंशन स्कीम लेनी होगी.जिसकी कोई गांरटी नहीं.
यानि नई पेंशन स्कीम के मुताबिक सरकार ने कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई को शेयर बाजार या किसी कंपनी के हवाले कर दिया.ऐसे में 50-60 साल बाद रिटायर होने पर समय कर्मचारी का पैसा कौन देगा इसकी कोई गारंट भी नहीं दिखती.
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नेताओं के डबल-डबल पेंशन मिलती है
देश में एक दिन के लिए भी सांसद या विधायक बनने पर जिंदगी भर पेंशन मिलती है.एक पूर्व सांसद को हर महीने 20 हजार रुपये पेंशन मिलती है.मुफ्त रेल यात्रा के अलावा तमाम भत्ते अलग.सांसद या पूर्व सांसद की मृत्यु पर उनके पति, पत्नी या आश्रित को आधी पेंशन दी जाती है…एक गजब का नियम ये भी है कि, सांसदों और विधायकों को डबल पेंशन लेने का भी हक है.अगर कोई व्यक्ति पहले विधायक रहा हो और बाद में सांसद भी बना हो तो उसे दोनों की पेंशन मिलती है.
