‘प्रताड़ित पतियों’ का जंतर-मंतर पर लगा जमावड़ा, पुरूष आयोग बनाने की उठाई मांग

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दिल्ली: बाल आयोग, मानवाधिकार आयोग, पशु-पक्षियों के आयोग, महिला आयोग यानि अभी तक आपने तमाम तरह के आयोग देखे और सुने होंगे. लेकिन देश की  राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जमा भीड़ एक ऐसे आयोग की मांग कर रही है जिसने हर किसी को चौंका दिया है.

पुरुष आयोग बनाने की मांंग पर जमावड़ा

तमाम तरह के लिखे नारे और तमाम मांगो के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी. इस जमावड़े में शामिल लोगों की मांग है कि, महिला आयोग की तरह पुरुष आयोग भी बनना चाहिए. इस प्रदर्शन में शामिल हुए लोगों का कहना कि, देश में तमाम तरह के आयोग हैं लेकिन पुरुषों की पीड़ा सुनने वाला कोई आयोग नहीं है. लिहाजा जल्द से जल्द एक पुरूष आयोग बनना चाहिए.

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क्यों कर रहे पुरुष आयोग की मांग

पुरूष कल्याण ट्र्स्ट के बैनर तले  इस प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि, देश में ऐशा कोई कानून नहीं है जो पुरूषों को उत्पीड़न से बचाता हो. देश में हर 8 मिनट में एक विवाहित आदमी आत्महत्या कर रहा है. और ये आंकड़ा डराने वाला है. ज्यादातर लोग उत्पीड़न के शिकार होकर ही ऐसा कदम उठाते हैं.

ऐसे छलका प्रताड़ित पुरूषों का दर्द

प्रदर्शनकारियों ने एक बड़ा से स्टेच्यू बनाया था जिसमें कई सरे तीर लगे हुए थे. उन तीरों पर वो तमाम मुद्दे लिखे हुए थे जिनके जरिए पुरुषों को प्रताड़ित होना पड़ता है. पुरूष कल्याण  ट्रस्ट के उपाध्यक्ष ऋत्विक बिसारिया का कहना था कि, ये स्टेच्यू वुंडेड भीष्मा हैं जिसके जरिए हम ये दिखा रहे हैं कि, कैसे एक निर्दोष आदमी का उत्पीड़न इस समाज में किया जाता है.

हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है

ऋत्विक बिसारिया ने पुरूष आयोग के आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि, अभी ये लड़ाई जारी रहेगी, आयोग बनने तक हम लोग चैन से नहीं बैठेंगे. फिलहाल हमने प्रताड़ित  पुरूषों की सहायता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. इसके जरिए बहुत सारे लोगों की सहायता कर चुके हैं. बिसारिया कहते हैं कि, आझ के समय में पुरूष आयोग की बेहद जरुरत है.

कोई नहीं करता मदद

इस प्रदर्शन में सैकड़ों लोग शामिल हुए. उनमें तमाम लोग लोग थे जो खुद किसी ना किसी तरह उत्पीड़न के शिकार थे और यहां वॉलिंटियर बनकर आए थे. उन्ही में से एक शख्स से जब हमारी टीम ने बात की तो उन्होंने कहा कि, कुछ दिन पहले उन पर एक झूठा केस कर दिया गया था. थाने में जब अपनी बात रखनी चाही तो पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी बल्कि ये कहकर टरका दिया कि, आपकी बात सुनने के लिए कोई कानून ही नहीं है. और उस मामले में महिला का पक्ष ही मजबूत रहा. एक और प्रदर्शनकारी ने बताय कि, उनके पूरे परिवार को बहू ने झूठे केस में फंस दिया था परिवार को 6 साल सलाखों के पीछे रहना पड़ा. समाज में बेइज्जती हुई वो अलग. उस केस में अदालत में ये साबित हो गया था कि, महिला ने झूठा केस दर्ज कराया था लेकिन फिर भी उस महिला को सजा हीं हुई.

 

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