लखनऊ: सदैव सेवा में तत्पर और मित्र पुलिस ये उत्तर प्रदेश पुलिस का सूत्र वाक्य है. इसी सूत्र वाक्य के साथ देश के सबसे बड़े सूबे की पुलिस जनता की सेवा भी करती है. सुविधाओं के आभाव और सिस्टम की बेरुखी में भी उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान जनता की रक्षा और सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालने से भी नहीं चूकते. लेकिन दूसरों की जान बचाने वाले पुलिसकर्मी ना जाने क्यों अपनी जिंदगी से हारकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं एख अरसे से प्रदेश की पुलिस आत्महत्या के इस दंश से जूझ रही है. दर्द की दास्ता ऐसी है कि, आए दिन कोई ना कोई पुलिसकर्मी मौत को गला लगा रहा है. पुलिस की पीड़ा के परिदृश्य में जो दर्द पसरा है वो पाताल से भी गहरा है..क्योकि,केवल सिपाही ही इश देश के शिकार नहीं हुए हैं सिपाही से लेकर IPS तक भी आत्महत्या के इन आकड़ों में शामिल हैं. पुरानी और हाल की इन घटनाओं के आंकड़ों को देखें तो पुलिस ने होनहार IPS तक खोए हैं.
पुलिसकर्मियों की आत्महत्या के मामले
आगरा में हेड कॉन्सटेबल ने जितेंद्र ने फांसी लगाकर दी अपनी जान दे दी
.कासगंज में दरोगा देवी सिंह ने इसी दंश में दुनिया को अलविदा कह दिया
उन्नाव में सिपाही ने गंगापुल से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की
फूलपुर कोतवाली में तैनात सिपाही अनिल फांसी के फंदे पर झूल गए
बीते दिनों गाजियाबाद में दारोगा मधुप सिंह ने गोली मारकर आत्महत्या की थी
वहीं बिजनौर कलेक्ट्रेट में तैनात में सिपाही अंकुर राणा को भी जिंदगी रास नहीं आई
ASP राजेश साहनी ने ख़ुद को गोली मारकर जान दी थी।
कानपुर SP सिटी सुरेन्द्रदास ने जहरीला पदार्थ खाया था
हरदोई में दारोगा राजरतन वर्मा ने खुद को गोली मारी थी
मुरादाबाद में सिपाही सोमराज दिवाकर ने फांसी लगाई
बांदा में महिला सिपाही ने आत्महत्या की
गोरखपुर में दारोगा शिवकुमार ने फांसी लगाई थी
लखीमपुर खीरी में सिपाही रवि तोमर ने खुदकुशी की
मुजफ्फरनगर में महिला कॉन्सटेबल ने मौत को गले लगाया था
श्रावस्ती में SI मनोज यादव ने खुदकुशी की थी
बाराबंकी के हैदरगढ थाने की महिला कॉन्सटेबल ने की खुदकुशी
लखनऊ डायल 100 के दारोगा ने जान गंवा दी
फर्रूखाबाद में दारोगा ने खुद को 3 गोलियां मारीं थीं
कानपुर देहात में सिपाही नरेश यादव के खुद को गोली मारी थी
डीजीपी ओपी सिंह ने की है बड़ी पहल

उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी ओपी सिंह ने अपने पुलिसकर्मियों को हताश या निराशा से बचाने के लिए बड़ी पहल की है. पुलिसकर्मियों का मेंटल स्ट्रेस खत्म करने की कवायद शुरू की गई है. सभी जिलों के कप्तान, आईजी जोन और एडीजी को इस मामले में खास निर्देश दिए गए हैं. पुलिसकर्मियों की दिक्कत को लेकर सीएम के आईजीआरएस पोर्टल पर जो पुलिसकर्मियों की शिकायतें आई थीं उन पर रिपोर्ट तलब की गई है. छुट्टी, ट्रांसफर, भत्ते आदि पर प्लान बनाया जा रहा है.
क्या कहते हैं जानकार?
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट मानता है कि, बिना छुट्टी, बिना आराम के काम और परिवार की परेशानियों ने पुलिसकर्मियों के सामने दुश्वारियां पैदा कर दी हैं. वहीं पुलिस के आचरण पर तो तमाम उंगलियां उठ जाती हैं लेकिन सुविधा और सम्मान का सवाल हर कोई नहीं उठाता. पुलिसकर्मियों को जरुरत पर छुट्टी और आराम ना मिलना सबसे बड़ी समस्या है. https://apnauttarpradesh.co.in भी डीजीपी और सरकार से अपील करता है कि, सबकी रक्षा करने वाले पुलिसकर्मियों की भी रक्षा की जाए. उनके अधिकारों की रक्षा की जाए. उनकी जिंदगी की रक्षा की जाए. क्योंकि, इतने बड़े प्रदेश में कानून व्यवस्था और जनता में सुरक्षा की भावना पैदा करना पुलिस का बड़ा काम है.
