लखनऊ: सूबे के सरकारी महकमों में शुद्धिकरण के लिए जारी हुए एक शासनादेश ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों की नींद उड़ा दी है…और ये आदेश है अनिवार्य सेवानिवृति के लिए स्क्रीनिंग. दरअसल, बेईमान, भ्रष्ट, अनफिट और कामचोर कर्मचारियों के बोझ को कम करने के लिए योगी सरकार ने 50 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों का बोईया-बिस्तर बांधकर घर भेजने का फैसला किया है और इस फैसले को परवान चढ़ाने के लिए जो परवाना जारी किया गया है उसके मुताबिक इस तरह से स्क्रीनिंग होगी।
ऐसे होगी होगी स्क्रीनिंग?
31 मार्च 2022 को 50 साल की उम्र पूरी कर चुके कर्मचारियों की स्क्रिनिंग होगी
स्क्रीनिंग में दागी और अनफिट कर्मचारियों की लिस्ट बनेगी
स्क्रीनिंग का ये काम 31 जुलाई तक पूरा करना होगा
स्क्रीनिंग के बाद अनिवार्य रिटायरमेंट दे दिया जाएगा
हटाए गए कर्मचारियों की जानकारी 15 अगस्त तक कार्मिक विभाग को देनी होगी
हालांकि, 50 साल से उपर जबरिय़ा रिटायरमेंट का ये आदेश सभी पर लागू नहीं होगा
प्रदर्शन वाले कर्मचारी समय पर ही रिटायर होंगे
अब जबरिया रिटायरमेंट का फरमान तो जारी हो गया है लेकिन खलबली उस खेमे में मची है जो जिंदगी का बड़ा हिस्सा सरकारी सेवा में खपा चुके हैं उनके सामने यक्ष प्रश्न ये हैं कि, 60 साल की नौकरी में 50 साल पर रिटायर होने परिवार कैसे पालेंगे? पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारी तो बदमाशों से मुठभेड़ या दूसरे कारणों से शारीरिक नुकसान पा चुके कर्मचारी क्या करेंगे? सवाल ये भी है कि, कहीं निजी दुश्मनी का दंड, स्क्रीनिंग में नाम में नाम जोड़कर तो नहीं दिया जाएगा।
बड़े अफसर भी आएंगे दायरे में या नहीं ।
सरकारी महकमों में शुद्धिकरण का प्लान सराहनीय है. हर कोई तारीफ भी कर रहा है लेकिन एक और सवाल है जो शोर कर रहा है कि, क्या छोटे कर्मचारियों की छटनी से हो जाएगा शुद्धिकरण या बड़े-बड़े साहब भी इस दायरे में आएंगे ?
