अनुदेशकों के आंसू कौन पोंछेगा, अदालतों के आदेश भी ताक पर क्यों ?

अपना लखनऊ जॉब्स/एजुकेशन होमपेज स्लाइडर

लखनऊ: एक तरफ तो सियासी दल युवाओ-बेरोजगारों के लिए बड़े-बड़े वादे और दावे करती हैं. लेकिन सरकार में आने पर बात जब हकीकत में कुछ करने की हो तो कुछ नहीं होता हवा-हवाई वादों के सिवा. ऐसा ही कुछ ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के अनुदेशक जो अदालत के आदेश के बाद भी इंसाफ के लिए भटक रहे हैं. लेकिन सरकार के कानों तक इन अनुदेशकों की आवाज नहीं पहुंच रही है.

डबल बेंच का आदेश लिए भटक रहे अनुदेशक
अनुदेशको के वेतन भत्ते का मामला सपा सरकार से चला आ रहा है. बीजेपी ने भी इस मुद्दे पर खूब मुखरता दिखाई थी. लेकिन सत्ता में आने के बाद तो इन अनुदेशकों से मुंह ही फेर लिया. इतना ही नहीं 3 जुलाई 2019 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इन अनुदेशको के पक्ष में आदेश जारी किया था. अदालत ने अनुदेशकों को 17000 रूपए वेतन के साथ-साथ 2019 से 9% ब्याज दर के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था. इस मामले में अनुदेशकों को सिंगल और डबल बेंच में भी जीत मिली थी बावजूद इसके सरकार ने आदेश को हवा में उड़ा दिया. 3 जुलाई 2019 से लेकर अब से लेकर सरकार शासनादेश जारी नहीं कर सकी है और ये अनुदेशक अपने वेतन के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

क्या है मामला ?
दरअसल, साल 2013 में सपा शासनकाल में इन अनुदेशकों की नियुक्ति की गई थी. शुरुआत में इनका वेतन 7000 रूपये निर्धारित किया गया था. फिर तीन साल के बाद सरकार ने इनके वेतन को बढ़ाकर 15000 किए जाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था. तब इनका वेतन 7 हजार से बढ़ाकर 8470 रूपये कर दिया गया था.

अनुदेशकों से की गई थी रिकवरी
अनुदेशकों को बढ़ा वेतन देने के बजाए सरकार ने इन अनुदेशकों पर सितम भी खूब किए हैं. सपा सरकार में इन अनुदेशकों को जो 5 महीने तक 8470 रूपया वेतन दियी गया था. अनुदेशकों का आरोप है कि, सरकार बदलने के बाद आई बीजेपी सरकार ने उस बढ़ोतरी को अनुचित बताते हुए अनुदेशकों के खाते से 5 महीने का वेतन रिकवर कर लिया था. यानि 7 हजार की पगार वाले अनुदेशकों से 1470 रुपए के हिसाब से 5 महीने का वेतन वापस लिया गया था.

क्या-क्या करते हैं काम
अनुदेशक अंशकालीन होते हुए भी फुल ड्यूटी करते हैं. चुनाव ड्यूटी हो या, बीएलओ का काम हो, पल्स पोलियों की ड्यूटी हो या कोई सरकारी काम ये अनुदेशक सरकार और सिस्टम के कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं लेकिन आज हालात ये हैं कि, 7 साल से काम कर रहे ये अनुदेशक करीब 233 रुपए रोजाना पर नौकरी कर रहे हैं.

अनुदेशकों के मन की टीस
अनुदेशकों का कहना है कि, एक ओर तो सरकार 69000 जैसी भर्ती में कोर्ट के आदेश का अक्षरस: पालन करने की बात कह रही है वहीं अदालत के आदेश के बाद भी अनुदेशकों के मामले में मौन साधे हुए है.

(नोट- ये रिपोर्ट अनुदेशकों से बातचीत पर आधारित है)

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *