पार्टी से नहीं बल्कि खुद से थी सुषमा की पहचान, मंच पर ‘मैं’ नहीं बल्कि कहती थीं ये शब्द | खास बातें

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नई दिल्लीः पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का बुधवार देर रात 67 साल की उम्र में निधन हो गया. बुधवार शाम अचानक सीने में दर्द की शिकायत के बाद सुषमा स्वराज को एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. सुषमा स्वराज के निधन की खबर सुनते ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हर्षवर्धन सिंह एम्स पहुंचें.

बेहद खास राजनेताओं में से एक थीं सुषमा
सुषमा के निधन की खबर से सिर्फ बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं में दुख का मौहाल नहीं है बल्कि पूरे देश में एक शोक की लहर उठ गई है.

पार्टी नहीं खुद की थी जमीनी स्तर पर पहचान
सुषमा स्वराज के राजनीतिक करियर की बात करें तो उनकी पहचान बीजेपी नेता से ज्यादा एक कामकाजी और मददगार राजनेता के रूप में ज्यादा रही है. उन असरदार शख्सीयत के कारण उन्हें 2009 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा संसद में विपक्ष की नेता के तौर पर चुना गया था। आज भले ही बीजेपी में नरेंद्र मोदी का ही डंका बजता है लेकिन सुषमा स्वराज ने अपने कामों की वजह से पार्टी में अपनी अलग पहचान बनाई थी.

सुषमा स्वराज के बारे में खास बातें
सुषमा स्वराज की राजनीतिक करियर में उन्होंने कभी भी झूठे वादे नहीं किए. एक राजनेता पर खुद को उभारने के बाद सुषमा स्वराज ने केंद्रीय विदेश मंत्री पद को संभालते हुए कई मुद्दों को हल किया और विदेशों में फंसे भारतीयों को घर वापस लाने में मदद की.

अक्सर राजनेता सारे काम का क्रेडिट खुद लेना जानते हैं, लेकिन सुषमा स्वराज के साथ ऐसा कुछ भी नहीं था. वह शुरुआत से ही अपने कामों का क्रेडिट भी पार्टी और कार्यकर्ताओं को ही देती थी. सुषमा स्वराज हमेशा मै“मैं” की जगह “हम” का इस्तेमाल करती थी और अक्सर खुले मंच पर अपनी टीम को शुक्रिया कहती थी.

ये बात कुछ लोगों को ही पता है लेकिन सुषमा स्वराज ने शादी के बाद पति के सरनेम को तो नहीं अपनाया लेकिन उनके नाम को अपना सरनेम बना लिया.

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