आज है अष्टमी इस शुभ मुहूर्त में माता के स्वरूप कन्याओं को लगाइए भोग

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नई दिल्ली : आज शारदीय नवरात्र का आठवां दिन है. शारदीय नवरात्र के आठवें दिन मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विधान है, लेकिन अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन के बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है. अष्टमी और नवमी के दिन 3 साल से 10 साल की बच्चियों की कन्या स्वरूप में पूजा की जाती है. कहा जाता है कि कन्याएं माता का दूसरा स्वरूप है. जिस घर से कन्याएं खुश होकर जाती हैं, वहां सदैव खुशहाली बसती है.

बिना कन्या पूजन के पूरा नहीं होता व्रत
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जो लोग शारदीय नवरात्र में 9 दिन व्रत रखते हैं, उनका व्रत बिना कन्या भोजन के संपूर्ण नहीं माना जाता है. अलग-अलग उम्र की कन्याएं देवी के अलग-अलग रूप को दर्शाती हैं. नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्तों का नवरात्र व्रत पूरा होता है.

अष्टमी के दिन कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

पहला मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 20 मिनट तक.

दूसरा मुहूर्त- सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक.

नवमी के दिन कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

पहला मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 29 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक.

दूसरा मुहूर्त-सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 3 बजकर 3 मिनट तक.

जानिए क्या है कन्या पूजन की विधि…

कन्या भोजन के लिए सर्वप्रथम कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है. इसके बाद गृह में प्रवेश के दौरान कन्याओं के पैर धुलवाए जाते हैं और फिर उनके पैर पोछकर उन्हें आसन पर बैठाया जाता है. इसके बाद कन्याओं के माथे पर तिलक लगाकर हाथों में कलावा बांधा जाता है. इसके बाद मां दुर्गा का स्मरण करते हुए कन्याओं को भोजन परोसा जाता है. भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्‍य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पुनः पैर छूकर आशीष लें.

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